Canara Bank को RBI से बड़ी मंजूरी मिल गई है। बैंक अपने **₹1,500 करोड़** के Basel III कंप्लायंट एडिशनल टियर-1 (AT1) बॉन्ड्स पर कॉल ऑप्शन का इस्तेमाल करेगा, जिससे बैंक को अपनी कैपिटल कॉस्ट कम करने में मदद मिलेगी।
बॉन्ड रिडेम्पशन का गणित
बैंक का यह कदम पूरी तरह से कैपिटल मैनेजमेंट का हिस्सा है। कुल ₹1,500 करोड़ की वैल्यू वाले इन बॉन्ड्स पर कॉल ऑप्शन एक्सरसाइज करके बैंक अपनी महंगी उधारी को खत्म कर रहा है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से Basel III नियमों के दायरे में रहकर की जा रही है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
बैंक के लिए अपनी बैलेंस शीट को मजबूत रखना प्राथमिकता है। इस रिडेम्पशन से बैंक न केवल अपने ब्याज के खर्चों को बेहतर तरीके से मैनेज कर पाएगा, बल्कि इससे कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CAR) को भी ऑप्टिमाइज करने में मदद मिलेगी। मार्केट एक्सपर्ट्स इसे बैंक की बेहतर फाइनेंशियल हेल्थ का संकेत मान रहे हैं।
आगे का रास्ता
RBI की मंजूरी के बाद अब Canara Bank फॉर्मल रिडेम्पशन प्रोसेस शुरू करने जा रहा है। बॉन्डहोल्डर्स को उनकी मूल राशि (Principal Amount) तय शर्तों के अनुसार वापस लौटा दी जाएगी। यह पूरी प्रक्रिया रेगुलेटरी गाइडलाइंस के सख्त पालन के साथ की जा रही है, जो बैंक के बेहतर गवर्नेंस को दर्शाता है।
