Can Fin Homes के बोर्ड ने नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) के जरिए **₹5,000 करोड़** तक की राशि जुटाने को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत पहली किश्त में **₹900 करोड़** जुटाए जाएंगे, जिससे कंपनी की लिक्विडिटी और लेंडिंग कैपेसिटी मजबूत होगी।
फंड जुटाने का बड़ा मास्टरप्लान
हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर की दिग्गज कंपनी Can Fin Homes ने अपनी भविष्य की जरूरतों और लेंडिंग ऑपरेशंस को रफ्तार देने के लिए फंड जुटाने की बड़ी तैयारी की है। कंपनी बोर्ड ने ₹5,000 करोड़ तक के फंड को NCDs, टियर-II बॉन्ड्स और अन्य डेट इंस्ट्रूमेंट्स के जरिए जुटाने की अनुमति दी है।
इस फैसले के साथ ही बोर्ड ने ₹900 करोड़ की पहली किश्त (Tranche-I) के लिए जरूरी 'Key Information Document' को भी हरी झंडी दे दी है। ये डिबेंचर्स सिक्योर्ड, रिडीमेबल और टैक्सेबल होंगे।
क्यों लिया गया यह फैसला?
यह मंजूरी कंपनी को बाजार की स्थितियों के हिसाब से तेजी से फंड जुटाने की आजादी देती है। साल 2027 में होने वाली 40वीं AGM तक यह अधिकार प्रभावी रहेगा। इससे कंपनी को बार-बार बोर्ड की मंजूरी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और वह सही समय पर बाजार से पूंजी उठा पाएगी।
निवेशकों के लिए जोखिम और संकेत
अब सारी नजरें इस बात पर हैं कि कंपनी किस कूपन रेट (Coupon Rate) पर ये फंड जुटाती है।
- ब्याज दरों का असर: अगर कूपन रेट ज्यादा होता है, तो कंपनी के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) पर दबाव बढ़ सकता है।
- ALCO की भूमिका: फंड जुटाने का समय और अवधि तय करने का जिम्मा कंपनी की Executive और ALCO कमेटी को दिया गया है।
निवेशकों को अब आगे की एक्सचेंज फाइलिंग पर नजर रखनी चाहिए, जिसमें इन डिबेंचर्स की मैच्योरिटी, कूपन और इश्यू डेट की पूरी जानकारी सामने आएगी। साथ ही, कंपनी की क्रेडिट रेटिंग और होम लोन की डिमांड को ट्रैक करना भी जरूरी होगा।
