Beryl Securities के शेयर में बहार! रेवेन्यू **138%** उछला, कंपनी जुटाएगी **₹2.98 करोड़**

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AuthorNeha Patil|Published at:
Beryl Securities के शेयर में बहार! रेवेन्यू **138%** उछला, कंपनी जुटाएगी **₹2.98 करोड़**

Beryl Securities ने वितीय साल 2025-26 के लिए शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी के रेवेन्यू में **138%** की भारी बढ़ोतरी हुई है और यह **₹4.24 करोड़** तक पहुंच गया है। वहीं, नेट प्रॉफिट में **23.4%** का इजाफा हुआ है। इसके साथ ही, कंपनी **₹2.98 करोड़** का एक प्रेफरेंशियल इश्यू (preferential issue) लाने की योजना बना रही है।

Beryl Securities का जोरदार प्रदर्शन

Beryl Securities लिमिटेड ने वितीय साल 2025-26 के लिए अपने तिमाही नतीजों का ऐलान किया है। कंपनी के ऑपरेशंस से होने वाले रेवेन्यू में पिछले साल के ₹1.78 करोड़ की तुलना में 138.2% की जबरदस्त उछाल आई है, जो इस साल ₹4.24 करोड़ हो गया है। इसी तरह, कंपनी की कुल आय (Total Income) भी ₹1.87 करोड़ से बढ़कर ₹4.28 करोड़ हो गई है।

मुनाफे में 23.4% का इजाफा

कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 23.4% बढ़कर ₹31.74 लाख पर पहुंच गया है। वहीं, बेसिक अर्निंग्स पर शेयर (EPS) भी ₹0.53 से बढ़कर ₹0.65 हो गया है। यह आंकड़े कंपनी के ऑपरेशनल स्केल-अप में सफलता का संकेत देते हैं।

बिजनेस बढ़ाने के लिए फंड जुटाने की योजना

कंपनी ₹2.98 करोड़ का प्रेफरेंशियल इश्यू (preferential issue) लाने की तैयारी में है। इस फंड का इस्तेमाल मुख्य रूप से MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) और पर्सनल फाइनेंस सेक्टर में अपनी कर्ज देने की गतिविधियों (lending activities) को बढ़ाने के लिए किया जाएगा। यह कदम ब्रोकिंग सेक्टर से हटकर ज्यादा ग्रोथ वाले क्षेत्रों में कदम रखने की कंपनी की स्ट्रैटेजिक शिफ्ट को दर्शाता है।

कंपनी का बैकग्राउंड

Beryl Securities, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ एक NBFC-ICC (Investment & Credit Company) के रूप में रजिस्टर्ड है। कंपनी लगातार अपने बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन पर काम कर रही है और नए लेंडिंग सेगमेंट में मौकों का फायदा उठाने का लक्ष्य रखती है।

क्या हैं जोखिम?

कंपनी ने वैश्विक आर्थिक मंदी, मंदी के दबाव और महंगाई जैसे कई जोखिमों की पहचान की है, जो इसकी ग्रोथ को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा, फंड की ऊंची लागत, एसेट क्वालिटी में संभावित गिरावट और बढ़ती प्रतिस्पर्धा जैसी परिचालन संबंधी चुनौतियां भी हैं। कंपनी के ऑडिटर ने भी लोन पर इंपेयरमेंट लॉस अलाउंस (impairment loss allowance) के असेसमेंट को एक महत्वपूर्ण ऑडिट मैटर बताया है, क्योंकि इसमें अपेक्षित क्रेडिट लॉस (expected credit losses) का अनुमान लगाना काफी जटिल है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.