Bank of Maharashtra की सालाना रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। बैंक SEBI की लिस्टिंग नियमों का पालन नहीं कर रहा है, खासकर बोर्ड और समितियों के स्ट्रक्चर को लेकर। बैंक ने इसकी वजह सरकारी नियुक्तियों की प्रक्रिया को बताया है।
Bank of Maharashtra की फाइनेंशियल ईयर **31 मार्च, 2026** को समाप्त हुई अवधि के लिए वार्षिक सेक्रेटेरियल अनुपालन रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक SEBI (लिस्टिंग ऑब्लिगेशन्स एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स) रेगुलेशन, **2015** के कई नियमों का पालन करने में विफल रहा है, खासकर इसके बोर्ड और विभिन्न समितियों के गठन को लेकर। ## क्या हुआ? रिपोर्ट में बताया गया है कि बैंक महिला निदेशक की नियुक्ति, बोर्ड पर स्वतंत्र निदेशकों के न्यूनतम प्रतिशत, समय पर निदेशक रिक्तियों को भरने और ऑडिट कमेटी, नॉमिनेशन और रेमुनरेशन कमेटी, रिस्क मैनेजमेंट कमेटी और स्टेकहोल्डर्स रिलेशनशिप कमेटी के सही गठन जैसी आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पाया है। ## क्यों यह मायने रखता है? SEBI के लिस्टिंग नियमों से ये विचलन कॉरपोरेट गवर्नेंस में संभावित कमजोरियों की ओर इशारा करते हैं। निवेशकों के लिए, इसका मतलब है कि बैंक पूरी तरह से निर्धारित कॉरपोरेट गवर्नेंस मानदंडों का पालन नहीं कर रहा है, जिससे निवेशकों का भरोसा प्रभावित हो सकता है और नियामक जांच का सामना करना पड़ सकता है, भले ही बैंक एक राष्ट्रीयकृत इकाई है। ## असल वजह क्या है? Bank of Maharashtra एक राष्ट्रीयकृत बैंक होने के नाते, बैंकिंग कंपनी (अधिग्रहण और उपक्रमों का हस्तांतरण) अधिनियम, **1970** के तहत काम करता है। बैंक प्रबंधन इस गैर-अनुपालन के लिए निदेशकों की नियुक्ति में सरकार की भूमिका को जिम्मेदार ठहरा रहा है। वे इन नियुक्तियों में तेजी लाने के लिए वित्त मंत्रालय के तहत वित्तीय सेवा विभाग के साथ सक्रिय रूप से संवाद कर रहे हैं। ## अब क्या बदलेगा? बैंक ने इन मुद्दों को हल करने के लिए कदम उठाए हैं। **27 मार्च, 2026** से प्रभावी, नए स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति के बाद इसने अपनी ऑडिट कमेटी और रिस्क मैनेजमेंट कमेटी का पुनर्गठन किया है। हालांकि, सरकारी नियुक्तियों से जुड़ा मूल मुद्दा एक संरचनात्मक चुनौती बना हुआ है। ## जोखिम पर नजर निवेशकों को सरकार द्वारा निदेशक नियुक्तियों की प्रगति और SEBI के मानदंडों के साथ अपनी समिति संरचनाओं को संरेखित करने के बैंक के चल रहे प्रयासों पर नजर रखनी चाहिए। बाहरी सरकारी समय-सीमा पर निर्भरता एक निरंतर जोखिम प्रस्तुत करती है। ## पीयर कंपैरिजन सरकारी नियुक्ति प्राधिकरण के कारण सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अक्सर समान चुनौतियों का सामना करते हैं। जबकि निजी क्षेत्र के बैंकों के पास आमतौर पर बोर्ड नियुक्तियों में अधिक लचीलापन होता है, यह स्थिति राष्ट्रीयकृत ऋणदाताओं के परिचालन वातावरण की एक विशेषता है। ## खास आंकड़े यह गैर-अनुपालन **31 मार्च, 2026** को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर से संबंधित है। समिति पुनर्गठन के लिए सुधारात्मक कार्रवाई **27 मार्च, 2026** से शुरू की गई थी। ## निवेशकों के लिए सीख बैंक के SEBI लिस्टिंग नियमों का पालन चिंता का विषय बना हुआ है, जो मुख्य रूप से सरकारी नियुक्तियों से जुड़ी संरचनात्मक शासन समस्याओं के कारण है। निवेशकों को भविष्य के बोर्ड संरचनाओं और समिति अपडेट्स पर नज़र रखनी चाहिए।
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