Bank of Baroda ने NSE के बहुप्रतीक्षित IPO में अपनी बड़ी हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है। बैंक अपनी कुल होल्डिंग का **35%** यानी करीब **76.9 लाख** शेयर इस IPO के जरिए बाजार में उतारेगा।
तैयारी पूरी, एस्क्रो में ट्रांसफर हुए शेयर
बैंक ऑफ बड़ौदा ने अपनी रणनीतिक योजना के तहत नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के IPO में भागीदारी की औपचारिक पुष्टि कर दी है। बैंक ने 8 सितंबर, 2026 तक 7,690,375 शेयरों को एक निर्दिष्ट एस्क्रो (escrow) खाते में ट्रांसफर कर दिया है। यह कदम NSE के पब्लिक ऑफर प्रोसेस की दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक पड़ाव है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
बैंक के लिए यह अपनी नॉन-कोर एसेट (non-core asset) से वैल्यू अनलॉक करने का एक शानदार तरीका है। बैंक अपनी लंबे समय से होल्ड की गई इस हिस्सेदारी को भुनाकर अपने कैपिटल बेस को मजबूत करना चाहता है। निवेशकों की नजर अब NSE IPO के फाइनल ऑफर प्राइस पर है, क्योंकि इसी से तय होगा कि बैंक को इस बिक्री से कितना बड़ा मुनाफा (quantum of gains) मिलने वाला है। उम्मीद है कि यह ट्रांजैक्शन सितंबर 2026 के अंत तक पूरा हो जाएगा।
कमाई का ट्रैक रिकॉर्ड
दिलचस्प बात यह है कि इस हिस्सेदारी को बेचने से पहले ही यह एसेट बैंक के लिए सोने का अंडा देने वाली मुर्गी साबित हुई है। हाल ही में बैंक को फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए NSE से ₹76.90 करोड़ का डिविडेंड (dividend) भी प्राप्त हुआ है।
अब आगे क्या?
निवेशकों को अब NSE के IPO की टाइमलाइन और प्राइस डिस्कवरी प्रोसेस पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। बैंक को मिलने वाली वास्तविक रकम पूरी तरह से IPO की सफलता और अंतिम वैल्यूएशन पर निर्भर करेगी।
