बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) ने विदेशी बाजारों से **400 मिलियन डॉलर** की रकम सफलतापूर्वक जुटाई है। यह पैसा सीनियर अनसिक्योर्ड फिक्स्ड-रेट नोट्स (Senior Unsecured Fixed-Rate Notes) जारी करके जुटाया गया है, जिनकी मैच्योरिटी 2031 में होगी।
बैंक ऑफ बड़ौदा ने 400 मिलियन डॉलर का कर्ज उठाया
बैंक ऑफ बड़ौदा ने 400 मिलियन डॉलर के सीनियर अनसिक्योर्ड रेग-एस फिक्स्ड रेट नोट्स (Senior Unsecured Reg-S Fixed Rate Notes) जारी किए हैं।
क्यों खास है ये डील:
इस बॉन्ड पर 5.318% प्रति वर्ष का कूपन रेट मिलेगा, जिसका भुगतान छमाही होगा। वहीं, ऑल-इन यील्ड (all-in-yield) 5.389% प्रति वर्ष है। इन नोट्स की मैच्योरिटी 5 साल है, जो 20 अगस्त 2031 को पूरी होगी। यह जारी की गई फिक्स्ड-रेट नोट्स की मौजूदा बकाया राशि पर एक 'टैप' (tap) इश्यू है, यानी उसी पुराने इश्यू में और पैसा जोड़ा गया है।
विदेशी बाजारों में मजबूत पकड़
यह कदम बैंक ऑफ बड़ौदा की विदेशी कैपिटल मार्केट्स से फंड जुटाने की क्षमता को दिखाता है। जुटाई गई राशि का इस्तेमाल बैंक की बैलेंस शीट को मजबूत करने और रेगुलेटरी जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा। सिंगापुर स्टॉक एक्सचेंज, इंडिया INX गिफ्ट सिटी और NSE-IX एक्सचेंज गिफ्ट सिटी पर लिस्टिंग से इन डेट इंस्ट्रूमेंट्स को लिक्विडिटी और विजिबिलिटी मिलेगी।
बैंक की पिछली परफॉर्मेंस
31 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, बैंक ऑफ बड़ौदा की कुल संपत्ति 20,092 बिलियन रुपये थी और प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 200 बिलियन रुपये रहा। बैंक का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CAR) 15.8% और ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) रेशियो 1.9% था। बैंक की मजबूत डोमेस्टिक मार्केट पोजिशन, विस्तृत ब्रांच नेटवर्क और अच्छी CASA फ्रेंचाइज (37.2%) इसकी ताकत हैं। भारत सरकार, जिसकी ~64% हिस्सेदारी है, का सपोर्ट भी एक अहम फैक्टर है।
आगे क्या?
इस डेट इश्यू से बैंक की फंडिंग प्रोफाइल मजबूत हुई है और यह अपनी वित्तीय देनदारियों को पूरा करने में सक्षम होगा। निवेशकों को भी बैंक के डेट में निवेश का एक नया जरिया मिला है।
ध्यान रखने वाली बातें
कुछ चिंताएं भी हैं, जैसे कि रीस्ट्रक्चर्ड पोर्टफोलियो और MSME व एग्रीकल्चर सेक्टर में एक्सपोजर से एसेट क्वालिटी पर असर पड़ सकता है। FY26 में मार्जिन में बदलाव और डिपॉजिट कॉस्ट बढ़ने से प्रॉफिट पर दबाव देखा गया था। RBI के एक्सपेक्टेड क्रेडिट लॉस (ECL) फ्रेमवर्क का असर बैंक के कैपिटल लेवल पर नजर रखी जानी चाहिए।
अन्य पब्लिक सेक्टर बैंक
बैंक ऑफ बड़ौदा, दूसरा सबसे बड़ा पब्लिक सेक्टर बैंक होने के नाते, एक प्रतिस्पर्धी माहौल में काम करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी दरों पर फंड जुटाने की इसकी क्षमता महत्वपूर्ण है।
जरूरी आंकड़े (समय-आधारित)
- कुल संपत्ति: 20,092 बिलियन रुपये (31 मार्च 2026)
- प्रॉफिट आफ्टर टैक्स: 200 बिलियन रुपये (31 मार्च 2026)
- कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CAR): 15.8% (31 मार्च 2026)
- ग्रॉस NPA: 1.9% (31 मार्च 2026)
- CASA फ्रेंचाइज: 37.2% (31 मार्च 2026)
- इश्यू राशि: 400 मिलियन डॉलर
- कूपन रेट: 5.318% प्रति वर्ष
- मैच्योरिटी: 20 अगस्त 2031
आगे क्या देखें?
निवेशकों को बैंक की एसेट क्वालिटी, खासकर MSME और एग्रीकल्चर सेक्टर में, और मार्जिन प्रेशर के बीच प्रॉफिटेबिलिटी को कैसे मैनेज करता है, इस पर नजर रखनी चाहिए। RBI के ECL फ्रेमवर्क का कैपिटल एडिक्वेसी पर असर भी महत्वपूर्ण होगा।
