Bank of Baroda FY26 BRSR: साल 2057 तक नेट ज़ीरो का लक्ष्य, ₹10,000 करोड़ के ग्रीन बॉन्ड जारी

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AuthorNeha Patil|Published at:
Bank of Baroda FY26 BRSR: साल 2057 तक नेट ज़ीरो का लक्ष्य, ₹10,000 करोड़ के ग्रीन बॉन्ड जारी
Overview

बैंक ऑफ़ बड़ौदा (Bank of Baroda) ने अपने FY26 BRSR रिपोर्ट में साल 2057 तक नेट ज़ीरो (Net Zero) का लक्ष्य रखा है। बैंक ने **₹10,000 करोड़** के ग्रीन बॉन्ड (Green Bonds) जारी किए हैं और **₹1,899 करोड़** का ग्रीन डिपॉजिट (Green Deposits) पोर्टफोलियो भी दिखाया है। साथ ही, बैंक पर **₹0.614 करोड़** का RBI जुर्माना भी लगा है। यह सब निवेशकों को बैंक के ESG फोकस के बारे में बताता है।

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बैंक ऑफ़ बड़ौदा का ESG प्लान

बैंक ऑफ़ बड़ौदा (Bank of Baroda) ने अपनी फाइनेंशियल ईयर 2025-26 की बिज़नेस रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट (BRSR) पेश कर दी है। इस रिपोर्ट में बैंक ने पर्यावरण को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है, जिसमें 2057 तक नेट ज़ीरो (Net Zero) हासिल करने का रोडमैप शामिल है। बैंक ने ₹10,000 करोड़ के लॉन्ग-टर्म ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड (Green Infrastructure Bonds) जारी किए हैं और ₹1,899.12 करोड़ का ग्रीन डिपॉजिट पोर्टफोलियो भी बनाया है। इसके अलावा, बैंक ने अपने स्कोप 1 और स्कोप 2 ग्रीनहाउस गैस (GHG) एमिशन का भी खुलासा किया है और ₹0.614 करोड़ (यानी ₹61.40 लाख) का RBI जुर्माना भी बताया है।

यह क्यों मायने रखता है?

बैंक ऑफ़ बड़ौदा की यह BRSR फाइलिंग दर्शाती है कि बैंक पर्यावरण (Environmental), सामाजिक (Social), और शासन (Governance) यानी ESG फैक्टर्स पर कितना ध्यान दे रहा है। ग्रीन बॉन्ड की बड़ी बिक्री और ग्रीन डिपॉजिट में बढ़ोतरी यह दिखाता है कि बैंक सस्टेनेबल फाइनेंस की ओर बढ़ रहा है। निवेशकों के लिए, यह बैंक की लंबी अवधि की पर्यावरण नीतियों और जिम्मेदार बैंकिंग प्रैक्टिस का सबूत है। हालांकि, RBI से लगे जुर्माने से रेगुलेटरी कंप्लायंस या ऑपरेशनल दिक्कतों की तरफ भी इशारा मिलता है, जिस पर ध्यान देने की जरूरत है।

बैकग्राउंड

बैंक ऑफ़ बड़ौदा अपने 'bobearth' प्रोग्राम के तहत सस्टेनेबिलिटी को लगातार अपने कामकाज में शामिल कर रहा है। इसमें ऊर्जा बचाने के उपाय और सोलर एनर्जी इंस्टॉलेशन जैसी चीजें शामिल हैं। बैंक का लक्ष्य अपने कार्बन फुटप्रिंट को कम करना और उत्सर्जन की इंटेंसिटी (emission intensity) को सुधारना है, जिसमें FY26 में FY25 की तुलना में सुधार देखा गया है।

आगे क्या होगा?

2057 तक नेट ज़ीरो के लक्ष्य और ग्रीन फाइनेंस में बड़े निवेश के साथ, बैंक ऑफ़ बड़ौदा खुद को एक ज़्यादा सस्टेनेबल भविष्य के लिए तैयार कर रहा है। निवेशकों को उम्मीद है कि बैंक अब अपनी रिपोर्टिंग और कामकाज में ESG मेट्रिक्स पर और ज़्यादा ध्यान देगा। बैंक अपने लोन पोर्टफोलियो में जलवायु जोखिमों (climate risks) की निगरानी और प्रबंधन भी करता रहेगा।

जोखिमों पर नज़र

बैंक भले ही अपने ESG एजेंडे पर आगे बढ़ रहा हो, लेकिन उसे अपने लोन बुक पर जलवायु परिवर्तन के असर और ऑपरेशनल कंटीन्यूटी को लेकर जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। 'Financial Services provided by Bank's' और 'Customer Service in Bank's' के नियमों का पालन न करने के कारण लगे ₹0.614 करोड़ के RBI जुर्माने से यह भी पता चलता है कि रेगुलेटरी नियमों और कस्टमर सर्विस प्रोटोकॉल पर लगातार ध्यान देने की ज़रूरत है।

पीयर तुलना

बैंक ऑफ़ बड़ौदा का कहना है कि उसके ₹1,899.12 करोड़ के ग्रीन डिपॉजिट पोर्टफोलियो ने अपने साथियों (peer banks) में सबसे ज़्यादा है। इससे पता चलता है कि सस्टेनेबल फाइनेंस को आकर्षित करने में बैंक को एक बढ़त हासिल है।

ज़रूरी आंकड़े (समय के साथ)

  • रिपोर्टिंग पीरियड: FY 2025-26
  • नेट ज़ीरो कमिटमेंट: 2057
  • ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड: ₹10,000 करोड़ (FY 2025-26)
  • ग्रीन डिपॉजिट: ₹1,899.12 करोड़ (31 मार्च 2026 तक)
  • RBI पेनाल्टी: ₹0.614 करोड़ (FY 2025-26)
  • स्कोप 1 GHG एमिशन: 3,589.37 टन (FY 2025-26)
  • स्कोप 2 GHG एमिशन: 153,835.74 टन (FY 2025-26)
  • एमिशन इंटेंसिटी (स्कोप 1+2 प्रति रुपया टर्नओवर): FY 2025-26 में सुधरकर 1.24 हुई (FY 2024-25 में 1.40 थी)।
  • परमानेंट कर्मचारी: 76,075 (FY 2025-26 तक)

आगे क्या देखें

निवेशकों को बैंक के नेट ज़ीरो रोडमैप पर आगे की प्रगति, उसके ग्रीन फाइनेंस पोर्टफोलियो का लगातार विकास, और पहचाने गए जलवायु और कंप्लायंस जोखिमों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने की बैंक की क्षमता पर नज़र रखनी चाहिए। भविष्य में RBI के साथ होने वाली बातचीत और ग्राहक सेवा मेट्रिक्स पर भी नज़र रखना महत्वपूर्ण होगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.