Balkrishna Paper Mills के शेयरहोल्डर्स ने कंपनी के कैपिटल रीस्ट्रक्चरिंग (Capital Restructuring) के एक बड़े प्लान को मंजूरी दे दी है। इसके तहत भारी-भरकम एक्युमुलेटेड लॉसेस (Accumulated Losses) को कम किया जाएगा और प्रेफरेंस शेयर्स (Preference Shares) को खत्म कर दिया जाएगा। इसके अलावा, कंपनी ने रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन्स (Related Party Transactions) के तहत इंटर-कॉर्पोरेट डिपॉजिट्स (Inter Corporate Deposits - ICDs) को भी हरी झंडी दे दी है।
Balkrishna Paper Mills में बड़ा फाइनेंशियल रीस्ट्रक्चरिंग!
Balkrishna Paper Mills Ltd. के शेयरहोल्डर्स ने हाल ही में हुए पोस्टल बैलेट (Postal Ballot) में कंपनी के शेयर कैपिटल (Share Capital) को घटाने और कई रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन्स (Related Party Transactions) को मंजूरी दी है। यह वोटिंग 2 जुलाई, 2026 को संपन्न हुई।
क्या हुआ खास?
शेयरहोल्डर्स ने एक स्कीम को अप्रूव किया है, जिसके तहत कंपनी के इक्विटी शेयर कैपिटल (Equity Share Capital) को ₹32.22 करोड़ से घटाकर ₹3.22 करोड़ कर दिया जाएगा। इसका मतलब है कि हर शेयर की फेस वैल्यू (Face Value) ₹10 से घटकर ₹1 हो जाएगी। इसके साथ ही, कंपनी के ₹110 करोड़ के पूरे प्रेफरेंस शेयर कैपिटल (Preference Share Capital) को भी खत्म (Extinguish) कर दिया जाएगा।
कंपनी को एस पी फाइनेंस एंड ट्रेडिंग लिमिटेड (S P Finance and Trading Limited) और संचना ट्रेडिंग एंड फाइनेंस लिमिटेड (Sanchna Trading and Finance Limited) से इंटर-कॉर्पोरेट डिपॉजिट्स (ICDs) लेने की भी इजाजत मिल गई है। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 और 2027-28 के लिए हर साल ₹25 करोड़ तक के ICDs लिए जा सकते हैं, जिनकी ब्याज दर 12% प्रति वर्ष तक होगी।
यह क्यों अहम है?
यह कैपिटल रीस्ट्रक्चरिंग कंपनी की बैलेंस शीट (Balance Sheet) को सुधारने के लिए की जा रही है। इसका मुख्य मकसद ₹52.28 करोड़ (30 सितंबर, 2025 तक) के एक्युमुलेटेड लॉसेस (Accumulated Losses) को रिजर्व्स (Reserves) और इक्विटी (Equity) के अगेंस्ट एडजस्ट करना है। प्रेफरेंस शेयर्स को खत्म करने और इक्विटी कम करने से कंपनी के फाइनेंशियल रेश्यो (Financial Ratios) में सुधार की उम्मीद है। ICDs की मंजूरी यह बताती है कि कंपनी को अभी भी लिक्विडिटी (Liquidity) की जरूरत है, जिसे वह रिलेटेड पार्टीज से पूरा करेगी।
अतीत की कहानी
Balkrishna Paper Mills लंबे समय से एक्युमुलेटेड लॉसेस से जूझ रही थी। इस नई स्कीम के तहत, कैपिटल बेस को कम करके और प्रेफरेंस शेयर देनदारियों को खत्म करके इस समस्या से निपटा जाएगा। प्रेफरेंस शेयर देनदारियों को तब तक अनसिक्योर्ड लोन (Unsecured Loan) के रूप में दिखाया जाएगा जब तक कि उन्हें चुकाना संभव न हो जाए।
अब क्या बदलेगा?
शेयरहोल्डर्स की मंजूरी के बाद, कंपनी अब नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) से कैपिटल रिडक्शन स्कीम (Capital Reduction Scheme) की पुष्टि के लिए आवेदन करेगी। इसके साथ ही, कंपनी अपनी फंड की जरूरतें पूरी करने के लिए रिलेटेड पार्टीज से ICDs का इस्तेमाल कर सकेगी।
जोखिम क्या हैं?
लगातार रिलेटेड पार्टी ICDs पर निर्भर रहना कंपनी के लिए एक जोखिम हो सकता है, अगर इसका ठीक से प्रबंधन न किया जाए। कैपिटल रिडक्शन के सफल कार्यान्वयन और इसके वित्तीय स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन महत्वपूर्ण होगा।
आगे क्या देखें?
निवेशकों को NCLT की मंजूरी प्रक्रिया, कैपिटल रिडक्शन की प्रभावी तिथि और कंपनी द्वारा ICDs के उपयोग पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। डेट-टू-इक्विटी रेशियो (Debt-to-Equity Ratio) और प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) जैसे प्रमुख वित्तीय मेट्रिक्स (Financial Metrics) पर इसके प्रभाव का आंकलन करना अहम होगा।
