Bajaj Finance ने प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए **2,12,000** जीरो-कूपन नॉन-कनवर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) जारी करके **₹2,120 करोड़** जुटाए हैं। **5** साल की अवधि वाले ये इंस्ट्रूमेंट्स **21 अक्टूबर 2031** को मैच्योर होंगे।
फंड जुटाने की रणनीति
Bajaj Finance ने अपनी पूंजी प्रबंधन रणनीति के तहत ₹2,120 करोड़ की राशि जुटाई है। कंपनी ने 2,12,000 सिक्योर रिडीमेबल नॉन-कनवर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) आवंटित किए हैं, जिनका फेस वैल्यू ₹1 लाख प्रति डिबेंचर है।
क्या है जीरो-कूपन का मतलब?
ये डिबेंचर्स 'जीरो-कूपन' आधार पर जारी किए गए हैं, जिसका मतलब है कि निवेशकों को कोई आवधिक ब्याज (periodic interest) नहीं मिलेगा। इसके बजाय, निवेशक को सीधे मैच्योरिटी तिथि, यानी 21 अक्टूबर 2031 पर मूल राशि (principal) का भुगतान किया जाएगा। इस इंस्ट्रूमेंट का टेन्योर 5 साल या 1,826 दिन का है।
सुरक्षा और लिस्टिंग
निवेशकों की सुरक्षा के लिए, इन NCDs को कंपनी के बुक डेट्स और लोन रिसीवेबल्स पर 'फर्स्ट पारि-पासु चार्ज' के साथ सुरक्षित किया गया है। बजाज फाइनेंस ने यह भी सुनिश्चित किया है कि पूरे कार्यकाल के दौरान 1.00 गुना का न्यूनतम सिक्योरिटी कवर बनाए रखा जाएगा। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए, इन डिबेंचर्स को BSE के होलसेल डेट मार्केट सेगमेंट में लिस्ट किया जाएगा।
आगे की राह
कंपनी के इस कदम से स्पष्ट है कि वह अपने रिटेल और SME लेंडिंग बिजनेस को विस्तार देने के लिए थोक ऋण बाजार (wholesale debt market) पर अपनी निर्भरता जारी रखेगी। आने वाली तिमाहियों में निवेशकों को कंपनी के कुल उधार और फंडिंग लागत (cost of funds) पर नजर रखनी चाहिए।
