B.R. Goyal Infrastructure का बड़ा कदम: ₹13.09 करोड़ जुटाने और उधारी सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव
B.R. Goyal Infrastructure लिमिटेड ने घोषणा की है कि वह नॉन-प्रमोटर इन्वेस्टर्स को 11,00,000 कन्वर्टिबल वारंट्स इश्यू करके ₹13.09 करोड़ जुटाएगी। इन वारंट्स की कीमत ₹119 प्रति वारंट तय की गई है। कंपनी का लक्ष्य है कि जून 2028 तक वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने के लिए इन पैसों का इस्तेमाल किया जाए। हर वारंट को इश्यू होने के 18 महीने के भीतर इक्विटी शेयर में बदला जा सकता है।
इसके अलावा, कंपनी अपने शेयरहोल्डर्स से मैक्सिमम Borrowing Limit (उधार लेने की अधिकतम सीमा) को बढ़ाकर ₹700 करोड़ करने की मंजूरी भी मांगेगी। इस उधारी को सुरक्षित करने के लिए कंपनी को अपनी एसेट्स पर चार्ज बनाने की भी इजाजत चाहिए होगी।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
इस कैपिटल इनफ्यूजन का मुख्य उद्देश्य कंपनी के वर्किंग कैपिटल को मजबूत करना है। वहीं, उधारी सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव भविष्य के ऑपरेशंस या एक्सपैंशन के लिए कंपनी की फाइनेंशियल लीवरेज को बढ़ाने की रणनीति को दर्शाता है। शेयरहोल्डर्स के लिए, इसका मतलब वारंट्स के कन्वर्जन पर उनके स्टेक का संभावित डाइल्यूशन (हिस्सेदारी का कम होना) और कंपनी पर बढ़े हुए डेट का बोझ हो सकता है।
आगे क्या?
यह पूरा प्रस्ताव शेयरहोल्डर की मंजूरी पर निर्भर करेगा, जिसके लिए 29 जून, 2026 को एक एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) बुलाई गई है। वोटिंग के अधिकार के लिए कट-ऑफ डेट 22 जून, 2026 रखी गई है।
अगर प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो वारंट्स के कन्वर्जन के बाद इक्विटी शेयर्स की कुल संख्या 2,38,24,704 से बढ़कर 2,49,24,704 हो जाएगी। प्रमोटर की हिस्सेदारी 73.60% से घटकर 70.35% होने की उम्मीद है। कंपनी को ₹700 करोड़ तक उधार लेने की फ्लेक्सिबिलिटी भी मिल जाएगी।
जोखिम पर भी रखें नजर
इन्वेस्टर्स को वारंट्स के कन्वर्जन के बाद होने वाले इक्विटी डाइल्यूशन से सावधान रहना चाहिए, जिससे उनकी ओनरशिप परसेंटेज कम हो जाएगी। बढ़ी हुई उधार सीमा यह भी संकेत देती है कि कंपनी कर्ज पर अधिक निर्भर हो सकती है, जिससे फाइनेंशियल रिस्क बढ़ सकता है।
