Aspect Global Ventures प्राइवेट लिमिटेड ने Duke Offshore लिमिटेड के मौजूदा प्रमोटरों से **70.61%** हिस्सेदारी खरीदने का सौदा किया है। इस सौदे के बाद, कंपनी में **26%** अतिरिक्त शेयरों के लिए **₹30** प्रति शेयर पर एक ओपन ऑफर (Open Offer) लाया जाएगा, जिससे मौजूदा प्रमोटर ग्रुप कंपनी से बाहर निकल जाएगा।
प्रमोटरों का एग्जिट और ओपन ऑफर का ऐलान
Duke Offshore लिमिटेड में स्वामित्व बदलने वाला है। Aspect Global Ventures प्राइवेट लिमिटेड ने कंपनी के मौजूदा प्रमोटरों - George Albert Donald Duke, Avik George Duke, और Komal Duke - से 70.61% शेयर खरीदने के लिए एक शेयर खरीद समझौते (SPA) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस बड़े सौदे के कारण, कंपनी के 26% वोटिंग शेयर कैपिटल के लिए सार्वजनिक शेयरधारकों (Public Shareholders) को ₹30 प्रति शेयर के भाव पर एक अनिवार्य ओपन ऑफर (Mandatory Open Offer) लाना होगा।
क्यों है यह अहम?
इस पूरे घटनाक्रम से Duke Offshore लिमिटेड का कंट्रोल बदलने वाला है। मौजूदा प्रमोटर ग्रुप कंपनी से एग्जिट करेगा और एक नया प्रमोटर ग्रुप कमान संभालेगा। ओपन ऑफर छोटे निवेशकों (Minority Shareholders) को ₹30 प्रति शेयर के निश्चित भाव पर बाहर निकलने का मौका देगा। अधिग्रहण करने वाली कंपनी Aspect Global Ventures ने पुष्टि की है कि ओपन ऑफर के लिए उनके पास पर्याप्त फंड हैं और उनकी कंपनी को डीलिस्ट (Delist) करने की कोई योजना नहीं है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा सौदा SEBI (Substantial Acquisition of Shares and Takeovers) रेगुलेशन, 2011 के तहत किया जा रहा है। अधिग्रहणकर्ता ने बताया है कि उनके पास ओपन ऑफर की अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन हैं। 26% हिस्सेदारी के लिए इस ओपन ऑफर की कुल राशि लगभग ₹7.69 करोड़ होगी, जबकि पूरे सौदे का मूल्य ₹20.88 करोड़ है।
अब क्या बदलेगा?
इस सौदे के बाद, मौजूदा प्रमोटर ग्रुप Duke Offshore लिमिटेड से बाहर हो जाएगा और Aspect Global Ventures प्रमोटर ग्रुप का हिस्सा बन जाएगी। कंपनी के शेयर ₹30 प्रति शेयर के भाव पर ओपन ऑफर के तहत खरीदे जाएंगे, जिसका भुगतान नकद (Cash) में होगा। अधिग्रहणकर्ता ने यह भी वादा किया है कि वे यह सुनिश्चित करेंगे कि कंपनी रेगुलेशन के अनुसार न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (Minimum Public Shareholding) की आवश्यकताओं को बनाए रखे।
संभावित जोखिम
अधिग्रहणकर्ता ने स्वीकार किया है कि यदि अधिग्रहण के बाद पब्लिक शेयरहोल्डिंग रेगुलेटरी न्यूनतम स्तर से नीचे चली जाती है, तो एक संभावित जोखिम हो सकता है। उन्होंने निर्धारित समय-सीमा के भीतर इसे 75% तक बहाल करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का वादा किया है।
आगे क्या देखें?
निवेशकों को ओपन ऑफर की समय-सीमा और उसमें मिलने वाली भागीदारी (Acceptance Levels) पर नज़र रखनी चाहिए। साथ ही, कंपनी को पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए अधिग्रहणकर्ता द्वारा उठाए जाने वाले कदमों पर भी ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा।
