Apollo Hospitals कर रहा कॉर्पोरेट रीस्ट्रक्चरिंग
Apollo Hospitals Enterprise Limited ने अपने बड़े बिज़नेस ऑपरेशन्स को रीस्ट्रक्चर करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी 24 जून 2026 को अपने सिक्योर्ड क्रेडिटर्स (Secured Creditors) की एक वर्चुअल मीटिंग आयोजित कर रही है। इस मीटिंग का मुख्य एजेंडा एक कम्पोजिट स्कीम ऑफ अरेंजमेंट (Composite Scheme of Arrangement) को मंजूरी दिलाना है।
क्या होने वाला है?
इस स्कीम के तहत, Apollo Hospitals अपने फार्मेसी डिस्ट्रिब्यूशन और डिजिटल हेल्थकेयर बिज़नेस को एक नई कंपनी 'Apollo Healthtech Limited' में डी-मर्ज करेगा।
क्यों है यह अहम?
इस कदम का मकसद कंपनी के बढ़ते डिजिटल हेल्थ और फार्मेसी डिस्ट्रिब्यूशन वाले बिज़नेस को एक फोकस एंटिटी (Focused Entity) देना है। इससे ऑपरेशनल एफिशिएंसी (Operational Efficiency) बढ़ सकती है और इन सेक्टर्स में स्ट्रैटेजिक फोकस (Strategic Focus) को मज़बूती मिलेगी।
जानिए पूरी कहानी
Apollo Hospitals का हॉस्पिटैलिटी से लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म 'Apollo 24|7' और अपने फार्मेसी डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क तक, हर जगह मज़बूत दखल है। इस डी-मर्जर से हर यूनिट को अपने हिसाब से आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।
क्या बदलेगा?
अगर यह स्कीम मंजूर हो जाती है, तो 'आइडेंटिफाइड बिज़नेस अंडरटेकिंग' (Identified Business Undertaking) को Apollo Healthtech Limited में डी-मर्ज किया जाएगा। यह नई कंपनी ओमनी-चैनल फार्मेसी डिस्ट्रिब्यूशन और डिजिटल हेल्थकेयर प्लेटफॉर्म, जिसमें Apollo 24|7 और टेलीहेल्थ (Telehealth) सर्विसेज़ शामिल हैं, को संभालेगी।
किन जोखिमों पर नज़र रखें?
इस स्कीम को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), शेयरहोल्डर्स, क्रेडिटर्स और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) जैसे रेगुलेटरी बॉडीज़ (Regulatory Bodies) से भी मंजूरी लेनी होगी।
अहम आंकड़े (समय-सीमा के साथ)
31 दिसंबर 2025 तक, कंपनी पर सिक्योर्ड क्रेडिटर्स का ₹173,793,856.16 और अनसिक्योर्ड क्रेडिटर्स का ₹349,993,178.70 का कर्ज़ था। अनुमान है कि डी-मर्ज होने वाले बिज़नेस का रेवेन्यू FY27 में ₹195.2 करोड़ से बढ़कर FY30 तक ₹492.80 करोड़ हो सकता है।
आगे क्या देखें?
निवेशकों को क्रेडिटर्स मीटिंग के नतीजों और NCLT व अन्य रेगुलेटरी बॉडीज़ से मिलने वाली मंज़ूरी पर बारीकी से नज़र रखनी चाहिए।
