Anjani Finance Ltd ने अपने बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। कंपनी अपना NBFC लाइसेंस सरेंडर कर एक अनरजिस्टर्ड कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के तौर पर काम करने का प्रस्ताव रख रही है। इसके साथ ही कंपनी ने Q1 FY26 के नतीजे भी मंजूर कर लिए हैं।
Anjani Finance का बड़ा रणनीतिक कदम: NBFC से CIC बनने की ओर
Anjani Finance Ltd ने अपने बोर्ड मीटिंग में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बदलाव को मंजूरी दी है। कंपनी अब अपना नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) लाइसेंस सरेंडर करने और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से एक अनरजिस्टर्ड कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के रूप में काम करने की मंजूरी मांगेगी। इस फैसले के साथ ही, कंपनी ने 30 जून 2026 को समाप्त पहली तिमाही (Q1 FY26) के अपने स्टैंडअलोन अनऑडिटेड वित्तीय नतीजों को भी मंजूरी दे दी है।
क्यों हो रहा है यह बदलाव?
NBFC से CIC बनने का यह प्रस्ताव Anjani Finance के बिजनेस मॉडल में एक बड़े बदलाव का संकेत देता है। NBFCs आमतौर पर सीधे लोन देने जैसे वित्तीय कामों में सक्रिय रहती हैं, जबकि CICs मुख्य रूप से अपनी सहयोगी कंपनियों के शेयर रखने वाली होल्डिंग कंपनियों की तरह काम करती हैं। इस बदलाव से कंपनी के रेगुलेटरी दायित्वों, जोखिम प्रोफाइल और राजस्व उत्पन्न करने के तरीकों में परिवर्तन आएगा। हालांकि, यह पूरा बदलाव RBI की मंजूरी पर निर्भर करेगा।
क्या बदलेगा अब?
अगर RBI इस प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाता है, तो Anjani Finance एक अलग रेगुलेटरी ढांचे के तहत काम करेगी। इससे कंपनी की निवेश रणनीतियों, पूंजी की आवश्यकताओं और रिपोर्टिंग मानकों में बदलाव आ सकता है। कंपनी ने अपनी 37वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) की तैयारियों को भी अंतिम रूप दे दिया है, जिसमें वोटिंग के लिए एक स्क्रूटिनाइजर की नियुक्ति और AGM नोटिस को मंजूरी देना शामिल है।
आगे क्या है?
निवेशकों को Anjani Finance की ओर से RBI के CIC आवेदन पर आने वाले किसी भी फैसले पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। नई संरचना के तहत कंपनी की भविष्य की परिचालन योजनाओं और वित्तीय प्रदर्शन पर अपडेट महत्वपूर्ण होंगे।
