Anand Rathi Share Price: फ्रॉड के बावजूद ₹23.35 Cr मुनाफा, कंपनी ₹500 Cr जुटाएगी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Anand Rathi Share Price: फ्रॉड के बावजूद ₹23.35 Cr मुनाफा, कंपनी ₹500 Cr जुटाएगी

Anand Rathi Share and Stock Brokers ने ₹23.35 करोड़ का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट दर्ज किया है। कंपनी को फ्रॉड ट्रांसफर के कारण क्लाइंट्स के नुकसान की भरपाई के लिए ₹20.99 करोड़ का एक्सेप्शनल एक्सपेंस (exceptional expense) झेलना पड़ा। अब कंपनी NCDs के जरिए ₹500 करोड़ तक जुटाने और दुबई में सब्सिडियरी (subsidiary) खोलने की योजना बना रही है।

Anand Rathi का मुनाफा ₹23.35 करोड़

Anand Rathi Share and Stock Brokers Ltd. ने अपने तिमाही नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने ₹246.10 करोड़ के रेवेन्यू पर ₹23.35 करोड़ का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट (consolidated profit) दर्ज किया है। हालांकि, इस दौरान कंपनी को एक बड़ा झटका भी लगा है। कंपनी को डीमैट खातों से हुए फ्रॉड शेयर ट्रांसफर (fraudulent off-market share transfers) के कारण क्लाइंट्स को हुए नुकसान की भरपाई के लिए ₹20.99 करोड़ का एक्सेप्शनल एक्सपेंस (exceptional expense) उठाना पड़ा।

क्या हैं कंपनी की आगे की योजनाएं?

इस मुश्किल वक्त में भी कंपनी अपने विस्तार की योजनाओं पर आगे बढ़ रही है। बोर्ड ने दुबई, UAE में एक व्होली ओन्ड सब्सिडियरी (wholly owned subsidiary) स्थापित करने को मंजूरी दे दी है, ताकि इंटरनेशनल क्लाइंट्स को बेहतर सेवाएं दी जा सकें। इसके साथ ही, कंपनी नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (Non-Convertible Debentures - NCDs) के जरिए ₹500 करोड़ तक की फंडरेजिंग (fundraising) करने की भी तैयारी कर रही है। कंपनी ने FY2026-27 के लिए ग्रुप एंटिटीज के साथ मटेरियल रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन्स (material related party transactions) को भी मंजूरी दे दी है, जिसे शेयरहोल्डर्स की सहमति मिलनी बाकी है।

फ्रॉड की जांच और आगे के रिस्क

कंपनी ने इस फ्रॉड की रिपोर्टिंग इकोनॉमिक ऑफेंसेस विंग (Economic Offences Wing - EOW) जैसी अथॉरिटीज को कर दी है और रिकवरी के लिए इंश्योरेंस क्लेम (insurance claims) भी फाइल कर दिए हैं। हालांकि, EOW की जांच के नतीजे कंपनी के लिए आगे चलकर कोई नया कानूनी या रेगुलेटरी (regulatory) जोखिम पैदा कर सकते हैं। इन्वेस्टर्स (investors) कंपनी के इंटरनल कंट्रोल मैकेनिज्म (internal control mechanisms) और सिक्योरिटी (security) को लेकर उठाए जा रहे कदमों पर भी बारीकी से नजर रखेंगे। कंपनी का कहना है कि कोई 'सिस्टेमिक फेलियर' (systemic failure) नहीं हुआ है, लेकिन इंश्योरेंस क्लेम से होने वाली रिकवरी एक महत्वपूर्ण फैक्टर रहेगी।

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