Ambassador Intra Holdings को BSE से इन-प्रिंसिपल अप्रूवल मिल गया है। कंपनी नॉन-प्रमोटर निवेशकों को **18 लाख** वारंट जारी करेगी, जिसकी न्यूनतम कीमत **₹21.50** प्रति शेयर तय की गई है।
क्या है पूरा मामला?
Ambassador Intra Holdings ने अपनी पूंजी जुटाने की प्रक्रिया में एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी को BSE से इन-प्रिंसिपल अप्रूवल मिल चुका है, जिसके तहत वह 18 लाख वारंट्स को प्रेफरेंशियल आधार पर जारी करेगी। ये वारंट्स नॉन-प्रमोटर निवेशकों को दिए जाएंगे। हर वारंट धारक को कंपनी के ₹10 फेस वैल्यू वाले एक इक्विटी शेयर में बदलने का अधिकार मिलेगा।
क्यों अहम है यह कदम?
यह नियामक मंजूरी कंपनी की वैधानिक प्रक्रियाओं को पूरा करने की दिशा में एक अनिवार्य कदम है। ₹21.50 का न्यूनतम फ्लोर प्राइस इस ट्रांजैक्शन के लिए एक बेंचमार्क तय करता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भविष्य में जब ये वारंट्स इक्विटी में बदलेंगे, तो कंपनी की कैपिटल स्ट्रक्चर में कितनी नई हिस्सेदारी जुड़ेगी।
रेगुलेटरी गाइडलाइन्स और शर्तें
13 अक्टूबर, 2026 को मिली इस मंजूरी के साथ BSE ने सख्त दिशा-निर्देश भी दिए हैं। कंपनी को Companies Act, 2013 और SEBI के ICDR नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा। इसमें मुख्य शर्तें हैं:
- आवंटित निवेशकों (allottees) की ट्रेड गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखना।
- आवंटन पूरा होने तक इंट्रा-डे ट्रेडिंग न करने का अंडरटेकिंग लेना।
- अलॉटमेंट के बाद लिस्टिंग के लिए समय पर आवेदन करना।
निवेशकों के लिए जोखिम
एक्सचेंज ने यह स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी स्तर पर गलत जानकारी या नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो यह मंजूरी वापस ली जा सकती है। इसके अलावा, पुराने निवेशकों को 'इक्विटी डाइल्यूशन' (equity dilution) पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि 18 लाख नए वारंट्स के कन्वर्ट होने से कुल शेयर बेस में बढ़ोतरी होगी।
अगले चरण में निवेशकों को उन डिस्क्लोजर पर नजर रखनी होगी, जिनमें अंतिम अलॉटीज (allottees) की लिस्ट और वारंट्स के कन्वर्जन की टाइमलाइन सामने आएगी।
