Amanaya Ventures ने FY26 के लिए अपने नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल के मुकाबले **114.5%** बढ़कर **₹84.78 करोड़** हो गया है। लेकिन, मुनाफे में **27.2%** की गिरावट आई है और यह **₹0.21 करोड़** पर पहुंच गया है। कंपनी **₹3 करोड़** जुटाने की भी योजना बना रही है।
Amanaya Ventures: शानदार रेवेन्यू ग्रोथ के बीच मुनाफे में आई गिरावट
Amanaya Ventures ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के नतीजे घोषित किए हैं। कंपनी का कुल रेवेन्यू पिछले फाइनेंशियल ईयर के ₹39.54 करोड़ से बढ़कर ₹84.78 करोड़ पर पहुंच गया है। यह 114.5% की जोरदार बढ़ोतरी है। इस रेवेन्यू ग्रोथ का मुख्य कारण कंपनी के फिजिकल बुलियन (Physical Bullion) और ज्वेलरी ट्रेडिंग (Jewellery Trading) वॉल्यूम में विस्तार है। इसके अलावा, डेरिवेटिव्स (Derivatives) और सिक्योरिटीज (Securities) में नए ऑपरेशंस से भी कंपनी को मदद मिली है।
मुनाफे में गिरावट की वजह?
भारी रेवेन्यू ग्रोथ के बावजूद, कंपनी का नेट प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (Net Profit After Tax) 27.2% घटकर ₹0.21 करोड़ (यानी ₹21.23 लाख) रह गया है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में यह ₹0.29 करोड़ था। कंपनी मैनेजमेंट का कहना है कि यह गिरावट प्रीशियस मेटल (precious metal) की कीमतों में आई अस्थिरता के कारण इन्वेंटरी के नेट रियलाइजेबल वैल्यू (Net Realisable Value - NRV) एडजस्टमेंट की वजह से है। यह कोई ऑपरेशनल इश्यू नहीं है।
₹3 करोड़ जुटाएगी कंपनी
कंपनी ने 12% कूपन रेट (coupon rate) के साथ सिक्योर, रिडीमेबल, नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (Secured, Redeemable, Non-Convertible Debentures - NCDs) के जरिए ₹3 करोड़ तक की राशि जुटाने की मंजूरी भी दे दी है। इस फंड का इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल (working capital) और सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। कंपनी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह अभी भी 'जीरो-डेट' (zero-debt) स्टेटस पर है।
'Aurel' ब्रांड पर फोकस
Amanaya Ventures अपने 'Aurel' ब्रांड के जरिए ब्रांड-लेड मॉडल की ओर बढ़ रही है। FY26 में इस ब्रांड का योगदान कुल ट्रांजेक्शन वैल्यू का लगभग 20% रहा। कंपनी को उम्मीद है कि 'Aurel' ब्रांड भविष्य में कंपनी के मार्जिन को बेहतर बनाने में मदद करेगा। प्रमोटर मिस्टर मnoon महाजन ने भी कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 36.12% कर ली है।
आगे क्या?
निवेशकों को अब 'Aurel' ब्रांड की परफॉर्मेंस और इसके मार्जिन पर पड़ने वाले प्रभाव पर नजर रखनी होगी। कंपनी की यह क्षमता कि वह कीमतों में अस्थिरता के बीच इन्वेंटरी वैल्यूएशन को कैसे मैनेज करती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा। साथ ही, जुटाए गए फंड का वर्किंग कैपिटल के लिए सफल उपयोग भी देखना होगा।
