Aksh Optifibre ने पिछली तिमाही के मुकाबले इस तिमाही में **₹5.38 करोड़** का मुनाफा दर्ज किया है। हालांकि, कंपनी फिलहाल कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के तहत है और ऑडिटर्स ने अनरिकॉर्डेड देनदारियों व निवेश में भारी गिरावट को लेकर चिंता जताई है।
नतीजों का क्या है सच?
Aksh Optifibre Limited ने 30 जून, 2026 को समाप्त तिमाही के लिए अपने अन-ऑडिटेड वित्तीय नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस ₹49.87 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि के ₹26.87 करोड़ से काफी ज्यादा है। वहीं, नेट प्रॉफिट ₹5.38 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल की पहली तिमाही (Q1 FY26) में ₹3.76 करोड़ का घाटा हुआ था। कंपनी की अर्निंग्स पर शेयर (EPS) भी बढ़कर ₹0.33 हो गया, जो पिछले साल -₹0.23 था।
मुनाफा और चिंता?
मुनाफे और रेवेन्यू में बढ़ोतरी के बावजूद, कंपनी 19 जून, 2026 को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के आदेश के बाद से कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) से गुजर रही है। यह इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया कंपनी के भविष्य और शेयरधारकों के लिए अनिश्चितता पैदा करती है। ऑडिटर्स की क्वालिफाइड ओपिनियन (Qualified Opinion) ने चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
पर्दे के पीछे की कहानी
Aksh Optifibre पिछले कुछ समय से वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रही थी, जिसके चलते NCLT ने CIRP का आदेश दिया। कंपनी के वित्तीय ब्यौरों की इस इनसॉल्वेंसी फ्रेमवर्क के तहत समीक्षा की जा रही है।
आगे क्या?
फिलहाल, कंपनी इंटरिम रेज़ोल्यूशन प्रोफेशनल (IRP), श्री प्रवीण कुमार सिंघल की देखरेख में काम कर रही है। हालांकि नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने IRP को आगे की कार्रवाई न करने और प्रमोटर की मदद से काम करने का निर्देश दिया है, लेकिन CIRP का ढांचा ही कंपनी की वित्तीय रिपोर्टिंग और फैसलों को नियंत्रित कर रहा है।
जोखिमों पर नजर
सबसे बड़ा जोखिम तो जारी CIRP से ही है। इसके अलावा, ऑडिटर्स की क्वालिफाइड ओपिनियन में EPCG स्कीम्स से जुड़ी अनरिकॉर्डेड देनदारियां (₹22.02 करोड़ का इंटरेस्ट, ₹8.40 करोड़ का ड्यूटी) और सब्सिडियरी में निवेश पर पहचानी न गई इम्पेयरमेंट लॉस (Aksh Technologies FZE: ₹25.84 करोड़, Aksh Composite Private Limited: ₹0.55 करोड़) जैसी गंभीर चिंताएं बताई गई हैं। ये मुद्दे बताते हैं कि रिपोर्ट किए गए वित्तीय आंकड़े कंपनी की असली तस्वीर पेश नहीं कर सकते हैं।
आगे क्या देखना है?
निवेशकों को CIRP की प्रगति, NCLT और NCLAT के किसी भी आदेश पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। साथ ही, कंपनी की अपने लेनदारों जैसे यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (₹49.73 करोड़), HDFC बैंक (₹36.63 करोड़) और बैंक ऑफ बड़ौदा (AED 270.20 लाख / लगभग ₹69.57 करोड़) के साथ देनदारियों को निपटाने की क्षमता महत्वपूर्ण होगी।
