Aadhar Housing Finance के निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। कंपनी ने वितीय साल 2026 (FY26) में अपने कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में **20%** की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की है। कंपनी का मुनाफा बढ़कर **₹1,095.88 करोड़** हो गया है। इसके साथ ही, कंपनी ने अपने बिजनेस को और बढ़ाने के लिए **₹9,000 करोड़** तक नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) जारी करने का प्रस्ताव भी दिया है।
Aadhar Housing Finance के FY26 के नतीजे
Aadhar Housing Finance ने वितीय साल 2025-26 के लिए अपने शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) ₹1,095.88 करोड़ रहा, जो पिछले वितीय साल (FY25) के ₹911.83 करोड़ की तुलना में 20% ज्यादा है। वहीं, स्टैंडअलोन PAT में भी अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली और यह ₹1,095.49 करोड़ पर पहुंच गया, जो पिछले साल ₹912.11 करोड़ था।
बिजनेस ग्रोथ के लिए बड़ा कदम
कंपनी ने अपने बिजनेस को बढ़ाने और कर्ज प्रबंधन के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मैनेजमेंट ने अगले एक साल में प्राइवेट प्लेसमेंट के आधार पर नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) के जरिए ₹9,000 करोड़ तक की राशि जुटाने का प्रस्ताव दिया है। इस प्रस्ताव को शेयरधारकों की मंजूरी के लिए रखा जाएगा।
इसके अलावा, कंपनी ने FY 2026-27 से तीन साल के लिए M/s. N. M. Raiji & Co. को जॉइंट स्टेट्यूटरी ऑडिटर (Joint Statutory Auditor) के तौर पर नियुक्त करने का भी प्रस्ताव दिया है।
क्यों अहम हैं ये नतीजे?
मुनाफे में यह मजबूत बढ़ोतरी कंपनी के बेहतर कामकाज और कम आय वाले हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर में लगातार बनी हुई मांग को दर्शाती है। ₹9,000 करोड़ के NCD जारी करने का प्रस्ताव कंपनी की विस्तार योजनाओं और फंड की जरूरतों को पूरा करने के लिए पूंजी जुटाने की सक्रियता को दिखाता है। कंपनी की क्रेडिट रेटिंग को CARE AA+ (Stable) तक अपग्रेड किया जाना भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाता है।
कंपनी की रणनीति और आगे क्या?
Aadhar Housing Finance मुख्य रूप से कम आय वर्ग के लोगों को घर खरीदने के लिए फाइनेंस उपलब्ध कराती है। कंपनी अपनी पहुंच बढ़ाने और डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल करके काम को और बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। कंपनी का लक्ष्य अपनी भौगोलिक पहुंच को मजबूत करना और ग्राहकों के लिए लोन की सुविधा को और आसान बनाना है।
जोखिम और आगे की राह
कंपनी की एसेट क्वालिटी (Asset Quality) मजबूत बनी हुई है, जिसमें मार्च 2026 तक ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) 1.08% पर था, जो कि इंडस्ट्री के औसत 1.6%–1.8% से बेहतर है। हालांकि, ₹9,000 करोड़ के NCDs को सफलतापूर्वक जारी करना और भविष्य में हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर या अर्थव्यवस्था में कोई बड़ी मंदी आने पर एसेट क्वालिटी पर पड़ने वाले असर पर नजर रखनी होगी।
