AGS Transact Technologies: दिवालिया प्रक्रिया के लिए मिली 60 दिनों की मोहलत, बदले वोटिंग नियम

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AuthorMehul Desai|Published at:
AGS Transact Technologies: दिवालिया प्रक्रिया के लिए मिली 60 दिनों की मोहलत, बदले वोटिंग नियम

AGS Transact Technologies की इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया (CIRP) को लेकर बड़ी अपडेट आई है। कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) ने रिजोल्यूशन प्रोसेस के लिए **60 दिनों** का अतिरिक्त समय दिया है और साथ ही वोटिंग के लिए नया टाई-ब्रेकर फॉर्मूला भी तय किया है।

18वीं CoC मीटिंग में लिए गए फैसले

AGS Transact Technologies लिमिटेड फिलहाल अपनी इंसॉल्वेंसी रिजोल्यूशन प्रक्रिया से गुजर रही है। कंपनी ने 25 सितंबर, 2026 को हुई 18वीं कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) मीटिंग के नतीजों का ऐलान किया है। इन फैसलों पर क्रेडिटर्स ने ई-वोटिंग के जरिए अपनी आधिकारिक मुहर लगा दी है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह अपडेट?

इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया के लिए 60 दिनों का यह एक्सटेंशन साफ इशारा है कि मामले को सुलझाने के लिए अभी और विचार-विमर्श की जरूरत है। इसके अलावा, कंपनी ने वोटिंग प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए एक नया 'टाई-ब्रेकर फॉर्मूला' लागू किया है। यह तब काम आएगा जब रिजोल्यूशन प्लान्स को लेकर वोट्स की संख्या बराबर हो जाएगी, जिससे कंपनी के चुनाव में किसी भी तरह की देरी या अस्पष्टता नहीं रहेगी।

अब क्या होगा?

फिलहाल कंपनी का मैनेजमेंट रेजोल्यूशन प्रोफेशनल बृजेंद्र कुमार मिश्रा के हाथों में है। क्रेडिटर्स ने बीमा खर्चों और वैल्युएशन फीस जैसी जरूरी प्रशासनिक लागतों को भी मंजूरी दे दी है ताकि कंपनी का कामकाज बिना किसी रुकावट के चलता रहे। अब निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस नई डेडलाइन के भीतर रिजोल्यूशन प्लान को लेकर क्या आम सहमति बन पाती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.