A2Z Infra Engineering ने FY26 के लिए **₹5.24 करोड़** का कंसॉलिडेटेड प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल के **₹1.03 करोड़** से काफी ज्यादा है। लेकिन, ऑडिटर ने 'Disclaimer of Opinion' जारी किया है, जो कंपनी की लिक्विडिटी (Liquidity) और गोइंग कंसर्न (Going Concern) पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
A2Z Infra Engineering के FY26 नतीजे: ऑडिटर के डिस्क्लेमर से कंपनी की मुश्किलें बढ़ीं
कंसॉलिडेटेड प्रॉफिट ₹5.24 करोड़ रहा, जबकि स्टैंडअलोन (Standalone) लेवल पर ₹2.79 करोड़ का घाटा दर्ज किया गया।
निवेशकों के लिए खास: कंसॉलिडेटेड प्रॉफिट में बढ़ोतरी अच्छी खबर है, लेकिन ऑडिटर का डिस्क्लेमर कंपनी की गंभीर वित्तीय समस्याओं और अनिश्चितता की ओर इशारा करता है।
क्या हुआ?
A2Z Infra Engineering Ltd ने वित्तीय वर्ष 2026 के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी ने कंसॉलिडेटेड आधार पर ₹5.24 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया है, जो पिछले वित्तीय वर्ष 2025 के ₹1.03 करोड़ के मुकाबले काफी बड़ी छलांग है। हालांकि, इसी दौरान कंपनी के स्टैंडअलोन ऑपरेशंस में ₹2.79 करोड़ का नेट लॉस हुआ है, जो पिछले साल के ₹1.05 करोड़ के लॉस से ज्यादा है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि कंपनी के ऑडिटर, MRKS AND ASSOCIATES, ने स्टैंडअलोन और कंसॉलिडेटेड दोनों वित्तीय स्टेटमेंट्स के लिए 'Disclaimer of Opinion' जारी किया है। इसका मतलब है कि ऑडिटर कंपनी के वित्तीय आंकड़ों की सटीकता और पूर्णता पर अपनी राय बनाने के लिए पर्याप्त सबूत इकट्ठा नहीं कर सके।
यह क्यों मायने रखता है?
ऑडिटर की तरफ से 'Disclaimer of Opinion' मिलना निवेशकों के लिए एक बहुत बड़ा रेड फ्लैग (Red Flag) है। यह इस बात का संकेत देता है कि कंपनी के भविष्य में लगातार चलते रहने (Going Concern) की क्षमता पर गंभीर संदेह है और यह कंपनी की वित्तीय सेहत से जुड़ी गंभीर समस्याओं को उजागर करता है। कंपनी की लिक्विडिटी (Liquidity) की स्थिति काफी खराब है, जहां करंट लायबिलिटी (Current Liabilities) करंट एसेट्स (Current Assets) से ₹64.92 करोड़ ज्यादा हैं। इसके अलावा, नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) बोरिंग्स पर भारी ब्याज, जो ₹39.36 करोड़ है, को अब तक बुक नहीं किया गया है।
बैकस्टोरी (The Backstory)
कंपनी काफी समय से वित्तीय मुश्किलों का सामना कर रही है, जैसा कि इसके स्टैंडअलोन घाटे और लिक्विडिटी की समस्या से जाहिर होता है। कंपनी का मैनेजमेंट स्वीकार करता है कि उन्हें बकाया देनदारियों (Receivables) को वसूलने में देरी हो रही है। साथ ही, प्रोजेक्ट साइट की जानकारी मिलने में दिक्कत और डायरेक्टर्स की अनुपलब्धता को नतीजों की देरी के लिए वजह बताया गया है।
अब क्या बदलेगा?
निवेशकों को इस डिस्क्लेमर को बहुत सावधानी से देखना चाहिए। हो सकता है कि ये वित्तीय स्टेटमेंट कंपनी की वास्तविक वित्तीय स्थिति को सही ढंग से न दर्शाएं, खासकर NPA बोरिंग्स पर अनरिकॉग्नाइज्ड ब्याज (Unrecognized Interest) और चल रहे कानूनी विवादों जैसी अनसुलझी समस्याओं को देखते हुए। कंपनी की गोइंग कंसर्न (Going Concern) के रूप में काम करते रहने की क्षमता गंभीर अनिश्चितता के घेरे में है।
जोखिम (Risks to Watch)
कंपनी कोजेनरेशन पावर प्लांट्स से जुड़े आर्बिट्रेशन (Arbitration) केस में फंसी हुई है, जिसमें उसके खिलाफ ₹72.35 करोड़ का अवार्ड (Award) जारी हुआ है। इसके अलावा, कंपनी की सब्सिडियरी A2Z Infraservices Ltd के कॉन्ट्रैक्ट्स को लेकर छत्तीसगढ़ के इकोनॉमिक ऑफेंसेस विंग (EOW) और एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) की जांच भी रेगुलेटरी और कानूनी जोखिमों को बढ़ाती है। लिक्विडिटी की कमी और NPA बोरिंग्स पर भारी अनरिकॉग्नाइज्ड ब्याज प्रमुख चिंताएं हैं।
आगे क्या ट्रैक करें?
निवेशकों को कंपनी के लिक्विडिटी के मुद्दों को हल करने, बकाया देनदारियों की वसूली करने और ऑडिटर की गोइंग कंसर्न और NPA बोरिंग्स से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के प्रयासों पर करीब से नजर रखनी चाहिए। चल रही आर्बिट्रेशन कार्यवाही और EOW/ACB जांचों के नतीजे भी महत्वपूर्ण होंगे।
