360 ONE WAM: कंप्लायंस में आई सख्ती! कंपनी ने सुधारे कंट्रोल, ₹44,840 का जुर्माना माफ

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
360 ONE WAM: कंप्लायंस में आई सख्ती! कंपनी ने सुधारे कंट्रोल, ₹44,840 का जुर्माना माफ
Overview

360 ONE WAM Limited ने अपना FY26 सीक्रेटेरियल कंप्लायंस रिपोर्ट (Secretarial Compliance Report) पेश किया है, जिसमें SEBI रेगुलेशन्स के पालन की पुष्टि की गई है। रिपोर्ट में पिछले वर्ष की दो छोटी कंप्लायंस से जुड़ी गड़बड़ियों का जिक्र है: प्रमोटर रीक्लासिफिकेशन (promoter reclassification) की देरी से हुई डिस्क्लोजर और नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (Non-Convertible Debentures) के लिए एक एनक्स्चर (annexure) का छूट जाना। दूसरी गड़बड़ी के लिए BSE द्वारा लगाया गया **₹44,840** का जुर्माना कंपनी द्वारा इंटरनल कंट्रोल्स को मजबूत करने के बाद माफ कर दिया गया।

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360 ONE WAM Limited ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए अपना सीक्रेटेरियल कंप्लायंस रिपोर्ट (Secretarial Compliance Report) जमा कर दिया है। इस रिपोर्ट ने यह पुष्टि की है कि कंपनी पूरे अवधि के दौरान SEBI के नियमों का पालन करती रही है। हालांकि, इसमें पिछले फाइनेंशियल ईयर के दौरान हुई दो खास कंप्लायंस से जुड़ी गड़बड़ियों का भी ब्यौरा दिया गया है।

नोट की गई गड़बड़ियों में प्रमोटर रीक्लासिफिकेशन (promoter reclassification) के संबंध में आवश्यक डिस्क्लोजर देने में सात दिन की देरी शामिल है, जिसके कारण पहले BSE और NSE से चेतावनी पत्र (Warning Letter) जारी हुआ था। इसके अलावा, दिसंबर 2024 को समाप्त तिमाही के लिए, कंपनी नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (Non-Convertible Debentures - NCDs) से संबंधित अपने फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स के साथ अनिवार्य एनक्स्चर (annexure) संलग्न करने में विफल रही।

NCD एनक्स्चर छूट जाने के बाद, BSE ने ₹44,840 का जुर्माना लगाया था। यह जुर्माना 10 अक्टूबर, 2025 को माफ कर दिया गया, जब कंपनी ने सुधारात्मक कदम उठाए और अपने इंटरनल कंट्रोल्स को और मजबूत किया।

भविष्य में कंप्लायंस से जुड़ी ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए, 360 ONE WAM ने अपने इंटरनल रिव्यू प्रोसेस को और बेहतर बनाया है। इसमें 'मेकर-चेकर' (maker-checker) मैकेनिज्म को मजबूत करना शामिल है, जिसका उद्देश्य कई स्तरों की निगरानी के माध्यम से सटीकता सुनिश्चित करना है। इन पिछली समस्याओं को हल करने पर कंपनी का फोकस उसके गवर्नेंस ढांचे को मजबूत करना है।

हालांकि माफ किया गया जुर्माना और मजबूत किए गए कंट्रोल आश्वासन देते हैं, निवेशक संभवतः गवर्नेंस पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेंगे। SEBI और स्टॉक एक्सचेंज की फाइलिंग की समय-सीमाओं का निरंतर पालन अपेक्षित है। वेल्थ मैनेजमेंट सेक्टर व्यापक रूप से सख्त SEBI कंप्लायंस फ्रेमवर्क के तहत काम करता है, जिससे निवेशकों का विश्वास बढ़ाने और नियामक स्थिति बनाए रखने के लिए कठोर पालन सर्वोपरि है। भविष्य में निवेशकों का ध्यान इन उन्नत कंट्रोल्स की लगातार प्रभावशीलता और किसी भी आगे की कंप्लायंस समस्या की अनुपस्थिति पर केंद्रित रहेगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.