Varroc Engineering के लिए सितंबर तिमाही मिली-जुली रही। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट **₹33.46 करोड़** दर्ज किया गया है। इटली में बिजनेस रिस्ट्रक्चरिंग और टैक्स सेटलमेंट के कारण मुनाफे पर दबाव दिखा है, साथ ही ऑडिटर्स ने भी कंपनी के अकाउंट्स पर सवाल उठाए हैं।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर एक नजर
Varroc Engineering ने चालू फाइनेंशियल ईयर की दूसरी तिमाही के नतीजे पेश कर दिए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस ₹2,947.92 करोड़ रहा, जो पिछले साल के ₹2,207.33 करोड़ के मुकाबले बेहतर है। हालांकि, नेट प्रॉफिट में गिरावट देखी गई, जो पिछले साल ₹63.26 करोड़ से घटकर ₹33.46 करोड़ पर आ गया है।
क्यों दबाव में है कंपनी का मुनाफा?
कंपनी ने अपने इंटरनेशनल फुटप्रिंट को छोटा करने के लिए इटली में मैन्युफैक्चरिंग और टेस्टिंग गतिविधियों से बाहर निकलने का फैसला किया है। इस दौरान कंपनी को ₹49.38 करोड़ का प्रोविजन और इटली रेवेन्यू एजेंसी के साथ ₹13.71 करोड़ का टैक्स सेटलमेंट करना पड़ा, जिसका सीधा असर बॉटम लाइन पर पड़ा है।
ऑडिटर्स की चिंता और कानूनी जोखिम
स्टैच्युटरी ऑडिटर्स ने कंपनी के नतीजों पर 'क्वालीफाइड कंक्लूजन' दिया है। उन्होंने TYC Parties के साथ चल रहे आर्बिट्रेशन से जुड़ी पिछली इनकम (करीब ₹44.17 करोड़) को सत्यापित करने में असमर्थता जताई है। इसके अलावा, OPmobility की ओर से सक्रिय आर्बिट्रेशन और पेंडिंग GST अपील निवेशकों के लिए आगे के रिस्क फैक्टर बने हुए हैं।
भविष्य की रणनीति
कंपनी अब घरेलू बाजार पर अपना फोकस बढ़ा रही है। इसके लिए Forsee Power India Private Limited में 45% हिस्सेदारी खरीदने का समझौता किया गया है, जिसके लिए कंपनी 6.50 मिलियन यूरो तक का निवेश कर सकती है। अब निवेशकों की नजर TYC मामले के निपटारे और नई एक्विजिशन से होने वाले मुनाफे पर टिकी है।
