Tolins Tyres के नतीजे: रेवेन्यू बढ़ा, पर मार्जिन पर दबाव
Tolins Tyres ने 31 मार्च 2026 को खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर (FY26) के नतीजे घोषित किए हैं। कंपनी ने 12% की जोरदार ईयर-ऑन-ईयर (YoY) ग्रोथ दर्ज करते हुए ₹327.12 करोड़ का रेवेन्यू हासिल किया। लेकिन, बॉटम-लाइन पर तस्वीर उतनी अच्छी नहीं है। नेट प्रॉफिट (PAT) पिछले साल के मुकाबले 7.7% घटकर ₹35.69 करोड़ पर आ गया है। कंपनी का EBITDA भी 17.5% गिरकर ₹47.8 करोड़ रहा, और EBITDA मार्जिन पिछले साल के मुकाबले घटकर 14.6% हो गया।
आखिर क्यों गिरा मुनाफा?
रेवेन्यू में बढ़ोतरी के बावजूद मुनाफे में गिरावट की मुख्य वजहें GST की दरों में अंतर और बढ़ता वर्किंग कैपिटल है। मैनेजमेंट के मुताबिक, री-ट्रेड (retread) सेगमेंट पर 18% GST लगता है, जबकि नए एग्री टायरों पर सिर्फ 5% GST है। इस अंतर के कारण री-ट्रेडेड टायर उतने कॉम्पिटिटिव नहीं रह पाते। इसके अलावा, लगभग ₹300 करोड़ का हाई वर्किंग कैपिटल कंपनी के कैश फ्लो पर दबाव बना रहा है। हालांकि, कंपनी को उम्मीद है कि आने वाले समय में इसमें सुधार होगा।
उत्पादन बढ़ा, पर दाम पर असर
Tolins Tyres ने FY26 में अपने प्रोडक्शन वॉल्यूम में 36% की जबरदस्त बढ़ोतरी की है, जो कंपनी की बढ़ी हुई प्रोडक्शन कैपेसिटी को दर्शाता है। लेकिन, यह वॉल्यूम ग्रोथ रेवेन्यू में उसी अनुपात में नहीं दिखी, जिसकी वजह कीमत में एडजस्टमेंट और बाजार की स्थितियां थीं। वहीं, कंपनी का UAE प्लांट 50% क्षमता से भी कम पर चल रहा है, जिसका कारण वहां की भू-राजनीतिक अस्थिरता और GCC देशों में कॉम्पिटिटिव प्राइसिंग है।
FY27 के लिए क्या है कंपनी का प्लान?
मैनेजमेंट ने FY27 के लिए सतर्क रुख अपनाया है। कंपनी का लक्ष्य FY26 के प्रदर्शन को बनाए रखना है। इसके लिए, बड़े कैपिटल एक्सपेंडिचर (CapEx) को फिलहाल रोक दिया गया है और कंपनी ऑटोमेशन और कॉस्ट-कटिंग पर फोकस कर रही है। निवेशक अब सरकार द्वारा GST दरों में विसंगतियों को दूर करने के किसी भी कदम का इंतजार करेंगे, साथ ही कंपनी के वर्किंग कैपिटल को कम करने के प्रयासों पर भी नजर रखेंगे।
मुख्य जोखिम
सबसे बड़ा जोखिम री-ट्रेड और नए टायरों के बीच GST दरों का अंतर है, जो री-ट्रेड सेगमेंट की डिमांड और प्रॉफिटेबिलिटी पर भारी पड़ रहा है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अस्थिरता UAE प्लांट के यूटिलाइजेशन को प्रभावित कर रही है। इसके अलावा, 4-5 महीने का हाई इन्वेंटरी और डीलरों को लंबा क्रेडिट पीरियड देना वर्किंग कैपिटल के मोर्चे पर चुनौतियां बढ़ा रहा है।
