Sibar Auto Parts ने FY26 में **21.8%** की शानदार रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है, लेकिन कंपनी का घाटा बढ़कर **1.59 करोड़ रुपये** हो गया है। बढ़ते खर्चों और रेगुलेटरी नियमों के उल्लंघन ने निवेशकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
मुनाफे पर क्यों पड़ा असर?
Sibar Auto Parts ने FY 2025-26 के लिए अपने स्टैंडअलोन फाइनेंशियल रिजल्ट्स जारी कर दिए हैं। हालांकि कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू 21.82% बढ़कर 26.94 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, लेकिन बॉटम लाइन पर इसका बुरा असर दिखा है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में जो घाटा 0.68 करोड़ रुपये था, वह अब बढ़कर 1.59 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। कंपनी का कहना है कि फाइनेंसिंग कॉस्ट और डेप्रिसिएशन में बढ़ोतरी इसकी मुख्य वजह है।
ऑडिटर्स और रेगुलेटरी की चेतावनी
कंपनी के लिए सिर्फ वित्तीय घाटा ही चुनौती नहीं है, बल्कि गवर्नेंस से जुड़े मुद्दे भी सामने आए हैं। ऑडिटर्स ने खुलासा किया है कि MSMEs को 3.19 करोड़ रुपये का भुगतान अभी बकाया है। इसके अलावा, कंपनी ने SEBI (LODR) नियमों का पालन करने में 43 दिनों की देरी की है, जो सीधे तौर पर सेक्रेटेरियल कंप्लायंस का उल्लंघन है।
मैनेजमेंट में बदलाव की तैयारी
कंपनी ने मैनेजमेंट लेवल पर बदलाव का भी ऐलान किया है। बोर्ड ने Mr. Pemmasani Ravichandra को अगले तीन साल के लिए मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर दोबारा नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा है, वहीं Mr. Madhu Pratap Pemmasani को रोटेशन के आधार पर दोबारा नियुक्त किया जाएगा।
आगे क्या होगा?
निवेशकों को अब कंपनी द्वारा MSME बकाए पर ब्याज प्रावधान (Interest provision) और रेगुलेटरी एक्शन पर अपडेट रहने की जरूरत है। बैलेंस शीट को मजबूत करने और घाटे को कम करने की दिशा में कंपनी क्या कदम उठाती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
