Rico Auto Industries: रेवेन्यू ₹755 करोड़ पार, पर कंपनी को हुआ घाटा

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Rico Auto Industries: रेवेन्यू ₹755 करोड़ पार, पर कंपनी को हुआ घाटा

Rico Auto Industries ने Q1 FY27 में शानदार ₹755 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया है, जो पिछले साल के मुकाबले 39% ज़्यादा है। हालांकि, कंपनी को ₹3.4 करोड़ का नेट लॉस हुआ है, जिसकी वजह बढ़ी हुई लागतें हैं।

Rico Auto Industries का Q1 FY27 रिजल्ट

ऑटो कंपोनेंट बनाने वाली कंपनी Rico Auto Industries ने पहली तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 39% बढ़कर रिकॉर्ड ₹755 करोड़ पर पहुंच गया है। यह कंपनी के लिए अब तक का सबसे ज़्यादा तिमाही रेवेन्यू है।

मुनाफे पर दबाव की वजह?

इतने शानदार रेवेन्यू के बावजूद, कंपनी को ₹3.4 करोड़ का नेट लॉस (Net Loss) हुआ है। पिछले साल की इसी तिमाही में कंपनी ने ₹16.7 करोड़ का मुनाफा कमाया था। कंपनी के मुताबिक, यह घाटा कुछ खास वजहों से आया है, जैसे एयर फ्रेट (Air Freight) और सॉर्टिंग पर ₹13 करोड़ का अतिरिक्त खर्च और कच्चे माल, खासकर एल्यूमीनियम की कीमतों में अचानक आई तेज़ी के कारण ₹10 करोड़ का नुकसान।

रेवेन्यू में तेजी क्यों?

कंपनी के रेवेन्यू में यह बढ़त नए ऑटोमोटिव प्रोग्राम्स (New Programs) के सफल लॉन्च की वजह से है। Rico Auto, Toyota, Ford और BMW जैसी बड़ी ग्लोबल ऑटो कंपनियों को पार्ट्स सप्लाई करती है। कंपनी का कहना है कि उसके पास 55 नए प्रोग्राम्स का पाइपलाइन है, जिनमें से 28 पर काम चल रहा है, जो आगे चलकर रेवेन्यू बढ़ाने में मदद करेंगे।

आगे क्या उम्मीद?

कंपनी का मैनेजमेंट मानता है कि लॉजिस्टिक्स (Logistics) से जुड़ी समस्याएं दूसरी तिमाही (Q2) में अपने चरम पर हो सकती हैं, लेकिन तीसरी तिमाही (Q3) तक हालात सामान्य होने की उम्मीद है। Rico Auto अपने ग्राहकों के साथ मिलकर बढ़ी हुई लागतों को एडजस्ट करने की कोशिश कर रही है। इसके अलावा, कंपनी CNC मशीनों की बाहरी बिक्री से भी कमाई का नया रास्ता खोल रही है, जिससे इस साल ₹35-40 करोड़ का रेवेन्यू आने की उम्मीद है।

किन जोखिमों पर नज़र?

ट्रांसपोर्टेशन में लगे ज़्यादा समय की वजह से एयर फ्रेट का इस्तेमाल महंगा साबित हो रहा है। साथ ही, हरियाणा में लेबर कॉस्ट (Labor Cost) में लगभग 40% की बढ़ोतरी और एनर्जी की बढ़ती कीमतें भी कंपनी के मार्जिन पर दबाव डाल रही हैं। यह देखना अहम होगा कि कंपनी इन बढ़ी हुई लागतों का बोझ ग्राहकों पर कितना डाल पाती है।

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