Pricol Limited के बोर्ड ने बड़ा ऐलान किया है। कंपनी अपने ड्राइवर इन्फॉर्मेशन और कनेक्टेड व्हीकल सॉल्यूशंस (DICVS) बिजनेस को एक नई कंपनी, Pricol Autotech Limited, में डीमर्ज (Demerge) करने की मंजूरी दे दी है। इसका मकसद दोनों बिजनेस को अलग-अलग पहचान देकर ग्रोथ के नए मौके तलाशना है।
Pricol Limited के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने एक अहम फैसले में कंपनी के ड्राइवर इन्फॉर्मेशन एंड कनेक्टेड व्हीकल सॉल्यूशंस (DICVS) बिजनेस को अलग करके एक नई कंपनी, Pricol Autotech Limited, में डालने की मंजूरी दे दी है। कंपनी अपनी ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी वाले ऑपरेशंस को अपने प्रिसिजन इंजीनियरिंग बिजनेस (ACFMS और P3L) से अलग कर रही है।
दो अलग प्लेटफॉर्म्स का निर्माण
इस डीमर्जर के बाद दो अलग-अलग बिजनेस प्लेटफॉर्म्स तैयार होंगे। कंपनी का अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2026 तक DICVS बिजनेस का टर्नओवर (Turnover) ₹2,424.63 करोड़ तक पहुंच जाएगा। यह कुल कंसोलिडेटेड टर्नओवर ₹4,052.37 करोड़ का 61.17% होगा।
क्यों है ये बड़ा फैसला?
इस डीमर्जर का मुख्य उद्देश्य दो फोकस्ड बिजनेस एंटिटीज बनाना है, ताकि हर कोई अपनी ग्रोथ स्ट्रेटेजी पर अकेले काम कर सके। इससे मैनेजमेंट का फोकस बढ़ेगा, कैपिटल एलोकेशन (Capital Allocation) बेहतर होगा और शेयरहोल्डर्स को कंपनी की वैल्यू का साफ अंदाजा लग सकेगा। DICVS बिजनेस कंपनी के ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी सेगमेंट का अहम हिस्सा है, जो कुल आय का 60% से ज्यादा हिस्सा देगा।
शेयर होल्डर्स को क्या मिलेगा?
Pricol Limited के शेयर होल्डर्स को हर एक शेयर के बदले Pricol Autotech Limited का एक शेयर मिलेगा, यानी 1:1 का रेशियो। डीमर्जर के बाद, Pricol Autotech में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 38.51% और पब्लिक की हिस्सेदारी 61.49% होगी।
क्या हैं खतरे?
यह पूरी स्कीम अभी कई अप्रूवल्स पर निर्भर है। कंपनी को सरकारी अथॉरिटीज, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) और शेयरहोल्डर्स व क्रेडिटर्स से मंजूरी लेनी होगी। इन अप्रूवल्स में लगने वाला समय एक बड़ा फैक्टर होगा।
आगे क्या?
निवेशकों को अब रेगुलेटरी फाइलिंग्स और NCLT की कार्यवाही पर करीब से नजर रखनी होगी। इन सभी मंजूरियों का सफल होना डीमर्जर को लागू करने के लिए बहुत जरूरी है।
