Precision Camshafts ने Q1 FY27 के लिए **₹14.88 करोड़** का स्टैंडअलोन प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछली तिमाही से बेहतर है लेकिन पिछले साल की इसी तिमाही से कम है। वहीं, जर्मन सब्सिडियरी को डीकंसॉलिडेट करने के चलते कंसोलिडेटेड प्रॉफिट में गिरावट आई है।
Precision Camshafts के Q1 FY27 के नतीजे
Precision Camshafts ने 30 जून, 2026 को समाप्त तिमाही के लिए अपने अनऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स (Financial Results) का ऐलान किया है। कंपनी ने स्टैंडअलोन आधार पर ₹160.47 करोड़ के रेवेन्यू पर ₹14.88 करोड़ का शुद्ध मुनाफा (Profit) दर्ज किया है।
कंसोलिडेटेड आधार पर, कंपनी का प्रॉफिट ₹8.45 करोड़ रहा, जबकि रेवेन्यू ₹187.80 करोड़ दर्ज किया गया। इस दौरान, कंपनी को ग्राहक मुआवजे (Customer Compensation) के रूप में ₹3.97 करोड़ का असाधारण आय (Exceptional Item Income) भी प्राप्त हुआ।
क्यों आई नतीजों में मिलाजुला असर?
स्टैंडअलोन नतीजों में पिछली तिमाही (मार्च 2026) की तुलना में प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार देखने को मिला है। हालांकि, कंसोलिडेटेड प्रॉफिट पिछली तिमाही और पिछले साल की समान तिमाही, दोनों की तुलना में कम है। इसका मुख्य कारण कंपनी की जर्मन स्टेप-डाउन सब्सिडियरी, MFT Motoren und Fahrzeugtechnik GmbH को डीकंसॉलिडेट (Deconsolidate) करना है।
जर्मन सब्सिडियरी का क्या है मामला?
Precision Camshafts की जर्मन सब्सिडियरी MFT Motoren und Fahrzeugtechnik GmbH फिलहाल लिक्विडेशन (Liquidation) की प्रक्रिया से गुजर रही है। 8 सितंबर, 2025 को कोर्ट ने एक प्रोविजनल लिक्विडेटर नियुक्त किया था, जिसके बाद से इस इकाई को ग्रुप के फाइनेंशियल से डीकंसॉलिडेट कर दिया गया है। इसी का सीधा असर कंसोलिडेटेड फाइनेंशियल आंकड़ों पर पड़ा है।
निवेशकों के लिए मतलब?
अब निवेशकों को Precision Camshafts के स्टैंडअलोन प्रदर्शन पर अधिक ध्यान देना होगा, क्योंकि कंसोलिडेटेड नंबरों में अब जर्मन ऑपरेशंस का पूरा हिसाब नहीं दिखेगा। कंपनी का मैनेजमेंट नई लेबर कोड्स (New Labour Codes) से जुड़े डेवलपमेंट पर भी नजर बनाए हुए है, जिसका भविष्य में कर्मचारी लाभ खर्चों पर असर पड़ सकता है।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशकों को Precision Camshafts के मुख्य व्यवसाय के परिचालन प्रदर्शन (Operational Performance) पर नजर रखनी चाहिए। साथ ही, MFT Motoren und Fahrzeugtechnik GmbH के लिक्विडेशन प्रोसेस की आगे की जानकारी और न्यू लेबर कोड्स के प्रभाव पर भी गौर करना महत्वपूर्ण होगा।
