Precision Camshafts ने FY26 के लिए अपने नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू और मुनाफा दोनों घटे हैं। इसकी मुख्य वजह जर्मन सब्सिडियरी से जुड़ा ₹48.90 करोड़ का भारी इम्पेयरमेंट चार्ज है।
Precision Camshafts ने पेश किए FY26 के नतीजे, सब्सिडियरी के इम्पेयरमेंट से मुनाफा घटा
Precision Camshafts Ltd. ने वितीय वर्ष 2025-26 के नतीजे घोषित कर दिए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल के ₹894.94 करोड़ से घटकर ₹821.61 करोड़ पर आ गया है। वहीं, कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) भी ₹54.11 करोड़ से गिरकर ₹51.25 करोड़ रह गया है।
कंपनी के स्टैंडअलोन रेवेन्यू की बात करें तो यह ₹624.20 करोड़ रहा, जबकि स्टैंडअलोन PAT सिर्फ ₹5.78 करोड़ दर्ज किया गया। इस वितीय वर्ष में कंपनी ने 1.08 करोड़ कैंमशाफ्ट्स का प्रोडक्शन किया और ₹1 प्रति इक्विटी शेयर का डिविडेंड घोषित किया है।
क्यों हुआ ये असर?
इस नतीजे पर सबसे बड़ा असर एक खास स्टैंडअलोन चार्ज का पड़ा, जो कि ₹48.90 करोड़ का था। यह चार्ज कंपनी की स्टेप-डाउन सब्सिडियरी, MFT Motoren und Fahrzeugtechnik GmbH, में निवेश के इम्पेयरमेंट (मूल्य हानि) से जुड़ा है। दरअसल, इस जर्मन कंपनी ने इंसॉल्वेंसी प्रोसीडिंग्स शुरू कर दी हैं, जिस कारण यह इम्पेयरमेंट चार्ज दर्ज किया गया और स्टैंडअलोन PAT पर भारी असर पड़ा।
कंपनी का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड
Precision Camshafts ऑटोमोटिव ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) के लिए कैंमशाफ्ट्स बनाती आई है। कंपनी के पास 2032 तक के बड़े ऑर्डर हैं। इसके अलावा, कंपनी सोलर एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भी नए मौके तलाश रही है। लेकिन, हाल के नतीजों में कंपनी के विदेशी ऑपरेशंस से जुड़ी चुनौतियां साफ दिखी हैं।
आगे क्या?
हालांकि कंपनी का मुख्य बिजनेस और ऑर्डर बुक मजबूत बनी हुई है, लेकिन जर्मन सब्सिडियरी से हुआ यह इम्पेयरमेंट लॉस एक बड़ा झटका है। कंपनी को अब रिस्क मैनेजमेंट कमेटी (RMC) की बैठकों में कमी और मैनेजेरियल रेमुनरेशन (प्रबंधकीय पारिश्रमिक) से जुड़े गवर्नेंस के मुद्दों को सुलझाना होगा और इसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी भी लेनी होगी।
ध्यान रखने वाली बातें
निवेशकों को अब जर्मन सब्सिडियरी के डूबने से हुए वित्तीय नुकसान और गवर्नेंस से जुड़ी कमजोरियों पर बारीकी से नजर रखनी होगी। कंपनी को रेगुलेटरी नॉर्म्स का बेहतर अनुपालन और मैनेजेरियल रेमुनरेशन के मामलों में पारदर्शिता दिखानी होगी, ताकि निवेशकों का भरोसा बना रहे।
