Maruti Suzuki India ने अगस्त 2025 से अब तक 50,000 से अधिक 'मेड-इन-इंडिया' इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्यात कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी अब भारत के पैसेंजर EV एक्सपोर्ट में **93%** हिस्सेदारी रखती है।
ग्लोबल मार्केट में मारुति का दबदबा
Maruti Suzuki India Limited ने अगस्त 2025 से अक्टूबर 2026 के बीच 50,000 इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्यात का मील का पत्थर हासिल कर लिया है। कंपनी अभी दुनिया के लगभग 50 देशों में अपनी गाड़ियों का निर्यात कर रही है, जिसमें यूरोप सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है। इसके अलावा, यू.के., नॉर्वे, जर्मनी और जापान में भी भारतीय इलेक्ट्रिक गाड़ियों की जबरदस्त मांग देखने को मिली है।
क्यों है यह मील का पत्थर खास?
अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान भारत के कुल पैसेंजर इलेक्ट्रिक व्हीकल एक्सपोर्ट में मारुति की हिस्सेदारी 93% रही है। यह आंकड़ा कंपनी के लिए एक बड़ा गेम चेंजर है, क्योंकि यह घरेलू मार्केट की अनिश्चितताओं के बीच कंपनी के बिजनेस मॉडल को सुरक्षा प्रदान करता है।
गुजरात प्लांट बना पावरहाउस
इस सफलता के पीछे गुजरात का हंसलपुर (Hansalpur) प्लांट मुख्य आधार है। कंपनी ने यहां ₹25,288.7 करोड़ का भारी-भरकम निवेश किया है। इस प्लांट की सालाना प्रोडक्शन क्षमता अब 10 लाख वाहनों की हो गई है, जो सुजुकी के किसी भी मैन्युफैक्चरिंग साइट के लिए एक वर्ल्ड रिकॉर्ड है।
आगे क्या?
निवेशकों के लिए अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यूरोप के बदलते नियमों और वहां के बाजार की मांग पर मारुति किस तरह अपनी पकड़ बनाए रखती है। पिछले 5 सालों से कंपनी पैसेंजर व्हीकल एक्सपोर्ट में नंबर-1 बनी हुई है, जो इसके ग्लोबल विजन को मजबूती देता है।
