Dhoot Transmission ने अपनी सब्सिडियरी कंपनियों, Dhoot Automotive Systems और Dhoot Autocomponents में **₹210.26 करोड़** का निवेश किया है। इस फंड का मुख्य मकसद कर्ज को कम करना और बैलेंस शीट को मजबूत बनाना है।
कर्ज से मुक्ति की रणनीति
कंपनी ने 28 अगस्त, 2026 को यह बड़ा निवेश पूरा किया है। इस इक्विटी इन्फ्यूजन (Equity Infusion) का मुख्य लक्ष्य इन सब्सिडियरी कंपनियों पर मौजूद उधार को चुकाना या प्री-पेमेंट करना है, ताकि उनकी वित्तीय स्थिति और बेहतर हो सके।
क्यों लिया यह फैसला?
यह कदम 12 अगस्त, 2026 को दाखिल किए गए कंपनी के प्रोस्पेक्टस के अनुरूप है, जिसमें 'डी-लीवरेजिंग' (De-leveraging) पर जोर दिया गया था। मैनेजमेंट का मानना है कि कर्ज का बोझ कम होने से कंपनी के पास भविष्य में विस्तार करने के लिए ज्यादा फंड उपलब्ध होगा।
कंपनियों का प्रोफाइल
- Dhoot Automotive Systems (DASPL): यह कंपनी सेंसर और बैटरी पैक बनाने का काम करती है। वित्त वर्ष 2025-26 में इसका टर्नओवर ₹745.72 करोड़ रहा। अब Dhoot Transmission की इसमें हिस्सेदारी 38.14% से बढ़कर 42.98% हो गई है।
- Dhoot Autocomponents (DACPL): यह कंपनी कनेक्टर्स और बैटरी टर्मिनल बनाती है। वित्त वर्ष 2025-26 में इसने ₹682.81 करोड़ का टर्नओवर दर्ज किया था। इस निवेश के जरिए कंपनी ने इसमें 9.99% की हिस्सेदारी हासिल कर ली है।
निवेशकों के लिए क्या है ट्रैक करने वाली बात?
निवेशकों को अब इन सब्सिडियरी कंपनियों के तिमाही मार्जिन (Quarterly Margins) पर नजर रखनी चाहिए। क्या कर्ज घटने से मुनाफे में सुधार आएगा और क्या कंपनी अपने विस्तार की योजनाओं को तेजी से पूरा कर पाएगी, यह आने वाली अर्निंग्स रिपोर्ट से साफ हो जाएगा।
