CIE Automotive India ने Q3 CY26 में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए **₹2,560 करोड़** की सेल्स दर्ज की है, जो पिछले साल के मुकाबले **11%** ज्यादा है। कंपनी ने अब एक्विजिशन के बजाय अपने ऑर्गेनिक बिजनेस को बढ़ाने के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) को दोगुना करने का बड़ा फैसला लिया है।
सेल्स में दमदार उछाल
कंपनी के हालिया नतीजों के अनुसार, भारत में इसकी पकड़ और मजबूत हुई है। घरेलू बाजार में सेल्स 18% बढ़कर ₹1,800 करोड़ पर पहुंच गई है। हालांकि, कुल कंसोलिडेटेड सेल्स ₹2,560 करोड़ रही। इस दौरान मार्जिन पर थोड़ा दबाव जरूर दिखा है, जो पिछले साल के 17.3% से घटकर 16.3% रह गया। इसके पीछे मुख्य वजह एनर्जी और कच्चे माल की बढ़ती लागत है।
नई रणनीति: 'ऑर्गेनिक ग्रोथ' पर दांव
कंपनी के मैनेजमेंट ने एक बड़ा बदलाव करते हुए अब अधिग्रहण (Acquisitions) का मॉडल छोड़कर पूरी तरह से इंटरनल ग्रोथ पर फोकस करने का निर्णय लिया है। इसके लिए कंपनी अपना ग्रोथ केपेक्स (Capex) बढ़ाकर सेल्स का करीब 8% करने जा रही है, जो पहले 5% के आसपास हुआ करता था। इस पूंजी का इस्तेमाल फोर्जिंग, गियर्स और एल्युमीनियम वर्टिकल की क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाएगा।
निवेशकों के लिए चेतावनी और रिस्क फैक्टर
मैनेजमेंट ने बताया कि पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के चलते लागत बढ़ रही है। हालांकि कंपनी ग्राहकों से इन खर्चों को पास-थ्रू करने (वसूली) के लिए बातचीत कर रही है, लेकिन मार्जिन की पूरी रिकवरी अभी सुनिश्चित नहीं है। साथ ही, यूरोप के कारोबार में 4% की गिरावट चिंता का विषय है, जिससे कंपनी की भारतीय बाजार पर निर्भरता और भी स्पष्ट हो गई है।
आगे क्या देखें?
निवेशकों को अब 'उर्स' (Urse) फाउंड्री प्रोजेक्ट और नई स्टैम्पिंग लाइन्स के कामकाज पर नजर रखनी चाहिए। उम्मीद है कि साल के अंत तक कंपनी अपनी कॉस्ट पास-थ्रू की बातचीत पूरी कर लेगी, जो मुनाफे को सहारा दे सकती है।
