Apollo Tyres शेयर में बंपर रिटर्न! FY26 में ₹28,471 Cr रेवेन्यू और ₹1,372 Cr मुनाफा, ₹2.50 डिविडेंड का ऐलान

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Apollo Tyres शेयर में बंपर रिटर्न! FY26 में ₹28,471 Cr रेवेन्यू और ₹1,372 Cr मुनाफा, ₹2.50 डिविडेंड का ऐलान

Apollo Tyres ने FY26 के नतीजे पेश कर दिए हैं, जिसमें कंपनी ने ₹28,471 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू और ₹1,372 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। इसके साथ ही, कंपनी ने ₹2.50 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड की भी सिफारिश की है।

Apollo Tyres के FY26 के शानदार नतीजे

Apollo Tyres ने वित्त वर्ष 2026 (FY26) के लिए अपने वित्तीय नतीजे घोषित किए हैं, जो कंपनी की मजबूत ग्रोथ को दर्शाते हैं। कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹28,471 करोड़ रहा, जो पिछले वित्त वर्ष FY25 के ₹26,123 करोड़ से ज़्यादा है। वहीं, कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट ₹1,372 करोड़ दर्ज किया गया, जो FY25 के ₹1,121 करोड़ की तुलना में बढ़ी है।

शेयरधारकों के लिए खुशखबरी!

कंपनी के बोर्ड ने ₹2.50 प्रति इक्विटी शेयर के फाइनल डिविडेंड की सिफारिश की है, जिससे निवेशकों को सीधा फायदा होगा। इसके अलावा, स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट में 194.19% का ज़बरदस्त उछाल आया और यह ₹1,851.77 करोड़ पर पहुंच गया, जिसका एक बड़ा कारण टैक्स में हुए सुधारों को माना जा रहा है।

क्यों अहम हैं ये नतीजे?

यह नतीजे Apollo Tyres की बाज़ार में मज़बूत पकड़ और परिचालन दक्षता को बताते हैं। कंपनी ने अपनी वित्तीय सेहत को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित किया है। इसका प्रमाण है कि डेट-इक्विटी रेशियो (Debt-Equity Ratio) FY25 के 0.27 से घटकर 0.20 हो गया है, और इंटरेस्ट कवरेज रेशियो (Interest Coverage Ratio) 5.60 से बढ़कर 10.31 हो गया है। इससे पता चलता है कि कंपनी अपने कर्जों को बेहतर तरीके से संभाल पा रही है।

आगे की रणनीति

कंपनी यूरोपीय ऑपरेशंस को बेहतर बनाने के लिए 30 जून, 2026 तक Enschede फैसिलिटी को बंद करने की योजना बना रही है। वहीं, BCCI के साथ स्पॉन्सरशिप डील ब्रांड की पहचान को भारत में और मज़बूत करेगी। ये कदम कंपनी को लगातार ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी की ओर ले जाने की रणनीति का हिस्सा हैं।

किन चीज़ों पर रहेगी नज़र?

मैनेजमेंट कच्चे माल, जैसे नेचुरल रबर और क्रूड-लिंक्ड इनपुट्स की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर बारीकी से नज़र रखे हुए है। इसके अलावा, भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं और रुपए के कमजोर होने से जुड़े फॉरेन एक्सचेंज के जोखिम भी कंपनी के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।

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