PPAP Automotive की Q4 में दमदार परफॉर्मेंस, नाम बदलकर 'अजय ग्रुप' हुआ
PPAP Automotive Limited ने अपने चौथी तिमाही (Q4) और पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के नतीजे पेश किए हैं। कंपनी ने अपने ऑटोमोटिव ज्वाइंट वेंचर (JV) PPAP Tokai India Rubber JV में अपनी हिस्सेदारी ₹100 करोड़ ($12 मिलियन) में बेच दी है। इस डिवेस्टमेंट (Divestment) से कंपनी को नई ग्रोथ के लिए कैपिटल (Capital) मिलेगा और उसका नेट डेट (Net Debt) भी घटकर ₹103 करोड़ ($12.4 मिलियन) रह गया है।
साथ ही, कंपनी ने FY26 के लिए ₹840 करोड़ ($101 मिलियन) का नया बिजनेस भी सुरक्षित किया है, जो इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और इंटरनल कम्बस्चन इंजन (ICE) प्लेटफॉर्म्स के लिए है। Q4 FY26 में कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) ₹174.6 करोड़ ($21 मिलियन) रहा, जबकि क्षमता उपयोग (Capacity Utilization) 78% रहा। पूरे FY26 का रेवेन्यू ₹567 करोड़ ($68 मिलियन) दर्ज किया गया।
नाम बदलेगा, कारोबार भी बदलेगा
अब PPAP Automotive 'अजय ग्रुप' (Ajay Group) के नाम से जानी जाएगी। कंपनी अपने टूलिंग बिजनेस को एक नई सब्सिडियरी (Subsidiary) Meraki Precision Tool Engineering Limited में अलग करेगी, जो Q2 FY27 तक पूरा हो जाएगा। इसके अलावा, Avinya Batteries Limited, पैरेंट कंपनी में Q4 FY27 तक मर्ज हो जाएगी।
ये कदम क्यों मायने रखते हैं?
इन कदमों से PPAP Automotive की स्ट्रैटेजिक दिशा (Strategic Direction) में बड़ा बदलाव आया है। JV से मिली रकम का इस्तेमाल ग्रोथ और डेट कम करने में होगा। नए बिजनेस में VinFast और Euler Motors जैसे नए क्लाइंट्स से मिले ऑर्डर शामिल हैं, जो SUV सेगमेंट के प्रोजेक्ट्स में 90% हिस्सेदारी रखते हैं।
इस पुनर्गठन (Restructuring) का मकसद ऑपरेशंस को सुव्यवस्थित (Streamline) करना और मुनाफे को बढ़ाना है। उम्मीद है कि बैटरी सेगमेंट FY27 तक PBT (Profit Before Tax) में प्रॉफिटेबल हो जाएगा, खासकर फुल कैपेसिटी यूटिलाइजेशन पर।
आगे क्या देखना है?
निवेशकों की नजर अब Meraki Precision Tool Engineering Limited और Avinya Batteries के मर्जर पर रहेगी। कंपनी की क्षमता उपयोग 80-82% तक पहुंचाने की योजना है। साथ ही, कंपनी अगले तीन सालों में अपनी मोल्ड प्रोडक्शन कैपेसिटी को दोगुना करके 300 मोल्ड्स प्रति वर्ष तक ले जाने का लक्ष्य रखती है।
जोखिम और चुनौतियाँ
भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) के कारण सप्लाई चेन में रुकावटें और इनपुट कॉस्ट में उतार-चढ़ाव का खतरा बना हुआ है। वर्तमान में, कच्चे माल की लागत में वृद्धि का केवल 50% ही ग्राहकों से वसूला जा पा रहा है। Q4 में लेबर कोड बदलावों से जुड़े ₹3.6 करोड़ ($0.43 मिलियन) के एकमुश्त कर्मचारी लाभ लागत (Employee Benefit Cost) ने भी मुनाफे को प्रभावित किया है।
