Zappfresh का असम में बड़ा कदम: 100 एकड़ में फिश फार्मिंग के लिए एमओयू साइन

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Zappfresh का असम में बड़ा कदम: 100 एकड़ में फिश फार्मिंग के लिए एमओयू साइन

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Zappfresh (DSM Fresh Foods) ने 'असम एक्वा प्रोजेक्ट' के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। इस प्रोजेक्ट के तहत 100 एकड़ जमीन पर मछली पालन होगा, जिससे सालाना 300 टन उत्पादन का लक्ष्य है। यह कंपनी के सीफूड बिजनेस में बैकवर्ड इंटीग्रेशन को मजबूत करेगा और बेहतर सोर्सिंग व क्वालिटी कंट्रोल में मदद करेगा।

Zappfresh ने शुरू किया 'असम एक्वा प्रोजेक्ट'

DSM Fresh Foods Ltd (Zappfresh) ने 'असम एक्वा प्रोजेक्ट' को विकसित करने के लिए एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MOU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कदम कंपनी के सीफूड बिजनेस में बैकवर्ड इंटीग्रेशन को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल है।

क्या हुआ है?

कंपनी ने असम के गोहपुर में गोहपुर फिश फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के साथ मिलकर एक फ्रेशवॉटर मछली पालन इकोसिस्टम स्थापित करने के लिए यह एग्रीमेंट किया है। यह प्रोजेक्ट 100 एकड़ में फैला होगा और इसका लक्ष्य सालाना 300 टन मछली उत्पादन क्षमता हासिल करना है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

Zappfresh की यह दूसरी एक्वाकल्चर पार्टनरशिप है और यह उनकी 'सीड-टू-फोर्क' (बीज से थाली तक) रणनीति के अनुरूप है। इसका मकसद सोर्सिंग में स्थिरता लाना, फीड से लेकर हार्वेस्ट (कटाई) तक क्वालिटी कंट्रोल को बेहतर बनाना और प्रोसेसिंग व कोल्ड चेन नेटवर्क जैसे डाउनस्ट्रीम इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास करना है।

पिछली क्या कहानी है?

यह कदम Zappfresh के Varuna Aquatech के साथ पिछली एक्वाकल्चर साझेदारी के बाद आया है। कंपनी अपने सीफूड प्रोडक्ट्स के लिए एक अधिक नियंत्रित और अनुमानित सप्लाई चेन बनाने पर सक्रिय रूप से काम कर रही है।

अब क्या बदलेगा?

Zappfresh अपनी सप्लाई चेन पर अधिक नियंत्रण की ओर बढ़ रहा है। कंपनी एक विशुद्ध रिटेल मॉडल से 'सीड-टू-फोर्क' एप्रोच की ओर शिफ्ट हो रही है। इससे अलग-अलग थर्ड-पार्टी सप्लायर्स पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है।

किन जोखिमों पर नजर रखें?

एक बड़ा जोखिम 'ऑपरेशनल एग्जीक्यूशन रिस्क' (संचालन संबंधी जोखिम) है। यह जमीनी स्तर पर संचालन के लिए थर्ड-पार्टी किसान सहकारी समितियों पर निर्भरता से जुड़ा है। निवेशक प्रोजेक्ट के माइलस्टोन और इस पार्टनर-आधारित मॉडल की स्केलेबिलिटी (विस्तार क्षमता) पर नजर रखेंगे।

आगे क्या ट्रैक करें?

निवेशकों को प्रोजेक्ट के चालू होने, उत्पादन लक्ष्यों को प्राप्त करने और कोल्ड चेन व डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के सफल एकीकरण पर भविष्य के अपडेट पर ध्यान देना चाहिए। स्थानीय उत्पादक कंपनी के साथ साझेदारी कितनी प्रभावी साबित होती है, यह महत्वपूर्ण होगा।

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Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.