Jay Shree Tea & Industries ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ₹21.83 करोड़ का स्टैंडअलोन नेट लॉस (Net Loss) दर्ज किया है। पिछले साल इसी अवधि में कंपनी ने ₹128.97 करोड़ का शानदार प्रॉफिट (Profit) कमाया था। इस बार कंपनी ने कोई डिविडेंड (Dividend) न देने का फैसला किया है।
Detailed Coverage
Jay Shree Tea का वित्तीय साल 2026 में बड़ा झटका
Jay Shree Tea & Industries Ltd ने वित्तीय वर्ष 2025-26 (31 मार्च 2026 को समाप्त) के लिए अपने नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने स्टैंडअलोन आधार पर ₹21.83 करोड़ का शुद्ध घाटा (Net Loss) दर्ज किया है। यह पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 की तुलना में एक बड़ी गिरावट है, जब कंपनी ने ₹128.97 करोड़ का शुद्ध लाभ (Net Profit) कमाया था।
क्यों हुआ नुकसान?
कंपनी की कुल आय (Revenue) की बात करें तो स्टैंडअलोन आधार पर यह ₹915.95 करोड़ रही, जबकि कंसोलिडेटेड (Consolidated) आधार पर यह ₹930.13 करोड़ दर्ज की गई। हालांकि, लागतों में बढ़ोतरी और चाय के गिरते भावों के चलते कंपनी को भारी नुकसान उठाना पड़ा। स्टैंडअलोन नेट लॉस ₹21.83 करोड़ रहा, वहीं कंसोलिडेटेड नेट लॉस ₹25.06 करोड़ दर्ज किया गया।
डिविडेंड (Dividend) पर बड़ा फैसला
नतीजों के साथ ही कंपनी के बोर्ड ने इस बार शेयरधारकों को कोई भी डिविडेंड (Dividend) न देने का फैसला किया है। पिछले साल जहां कंपनी ने ₹128.97 करोड़ का मुनाफा कमाया था, वहीं इस बार भारी घाटे के चलते यह निर्णय लिया गया है। यह निवेशकों के लिए एक निराशाजनक खबर है।
कंपनी का बैकग्राउंड और भविष्य की योजना
Jay Shree Tea का कारोबार मुख्य रूप से तीन सेगमेंट में बंटा है: चाय (51% ग्रॉस टर्नओवर), चीनी (32%) और उर्वरक (17%)। पिछले वित्तीय वर्ष में चाय के कारोबार में 135 लाख किलोग्राम का उत्पादन हुआ था, जो पिछले साल (139 लाख किलोग्राम) से कम है। सीटीसी चाय के औसत भाव में ₹30 प्रति किलोग्राम की गिरावट आई है।
हालांकि, चीनी उत्पादन 48,922 टन रहा, जो पिछले साल से बेहतर है। कंपनी अपनी चीनी और उर्वरक इकाइयों में उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उर्वरक इकाई में 400 TPD का नया ग्रैन्युलेशन प्लांट (Granulation Plant) लगाया जा रहा है, जिसके अगस्त 2026 तक चालू होने की उम्मीद है।
जोखिम और आगे क्या?
कंपनी के लिए इनपुट लागत में बढ़ोतरी, मजदूरों की कमी और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे चाय व्यवसाय में बने हुए हैं। कोलकाता कोर्ट में एक केस और बिहार में ज़मीन विवाद जैसे कानूनी मामले भी कंपनी पर असर डाल सकते हैं। ऑडिटर ने भी कुछ इकाइयों में अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर के ऑडिट ट्रेल (Audit Trail) सुविधा के सक्षम न होने की बात कही है। निवेशकों को अब चीनी और उर्वरक सेगमेंट में विस्तार योजनाओं, कानूनी मामलों के निपटारे और बढ़ती लागतों को नियंत्रित करने में कंपनी की कामयाबी पर नजर रखनी होगी।
