Navratna PSU Mazagon Dock Shipbuilders ने जून 2026 तक **₹18,218 करोड़** की मजबूत ऑर्डर बुक दर्ज की है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में कंपनी का नेट प्रॉफिट बढ़कर **₹2,578.4 करोड़** पर पहुंच गया है, जिसके पीछे डिफेंस सेक्टर की मांग और ऑयल एंड गैस क्षेत्र में विविधीकरण (diversification) का बड़ा हाथ है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर एक नजर
कंपनी के हालिया इन्वेस्टर अपडेट के अनुसार, FY26 में कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹2,578.4 करोड़ रहा है, जो पिछले साल के ₹2,413.5 करोड़ के मुकाबले काफी बेहतर है। कंपनी का रेवेन्यू भी FY25 के ₹11,431.9 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹13,006.3 करोड़ पहुंच गया है।
क्यों खास है यह ग्रोथ?
Mazagon Dock अब केवल एक डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर नहीं रह गई है। कंपनी अपनी पहुंच को कमर्शियल मरीन और ऑयल एंड गैस सेक्टर में बढ़ा रही है।
- ओएनजीसी (ONGC) कॉन्ट्रैक्ट्स: कंपनी ने ONGC के साथ नए करार कर अपने पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई किया है।
- निर्यात (Export): कंपनी अब अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर फोकस कर रही है।
- मेक इन इंडिया: P17A क्लास के जहाजों में इंडिजिनस (स्वदेशी) कंटेंट अब 75% तक पहुंच चुका है, जिससे कंपनी की लागत दक्षता (cost-efficiency) बढ़ी है।
कैपेसिटी का विस्तार और रिस्क
कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता को दोगुना करने के मिशन पर है। मुंबई पोर्ट अथॉरिटी से 15 एकड़ जमीन का अधिग्रहण और न्हावा (Nhava) में 37 एकड़ की साइट का विकास कंपनी को बड़ी परियोजनाओं के लिए तैयार कर रहा है। हालांकि, बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में काम की गति और P17A फ्रिगेट की डिलीवरी में देरी जैसे 'एग्जीक्यूशन रिस्क' पर निवेशकों को नजर रखनी होगी।
वर्तमान में कंपनी के पास कोलंबो डॉकयार्ड में 51% और गोवा शिपयार्ड में 47.21% की हिस्सेदारी है, जो इसे क्षेत्रीय स्तर पर एक मजबूत खिलाड़ी बनाती है।
