Apollo Micro Systems को वायु सेना से बड़ी डील! 'मेक-II' के तहत मिलेगा इंडिजिनस प्रिसिजन किट बनाने का मौका

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Apollo Micro Systems को वायु सेना से बड़ी डील! 'मेक-II' के तहत मिलेगा इंडिजिनस प्रिसिजन किट बनाने का मौका

Apollo Micro Systems को भारतीय वायु सेना ने इंडिजिनस प्रिसिजन रेंज एक्सटेंशन किट (IPREK) प्रोग्राम के लिए एक प्रमुख डेवलपमेंट एजेंसी के तौर पर चुना है। 'मेक-II' कैटेगरी के तहत यह महत्वपूर्ण पैनलिंग कंपनी को प्रिसिजन-गाइडेड म्यूनिशन के क्षेत्र में करोड़ों की कमाई का बड़ा मौका दे सकती है।

Detailed Coverage

भारतीय वायु सेना का बड़ा कदम

Apollo Micro Systems को भारतीय वायु सेना ने एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। कंपनी को इंडिजिनस प्रिसिजन रेंज एक्सटेंशन किट (IPREK) प्रोग्राम के लिए प्राइम डेवलपमेंट एजेंसी (Prime Development Agency) बनाया गया है। यह पहल डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर 2020 के 'मेक-II' (इंडस्ट्री फंडेड) कैटेगरी के तहत आती है।

क्या है IPREK?

कंपनी को IPREK को डेवलप करने का काम सौंपा गया है। यह एक ऐसा किट है जिसे मौजूदा 500 किलोग्राम वजन के अनगाइडेड जनरल पर्पस बमों पर लगाया जा सकेगा। इसे लगाने के बाद ये बम प्रिसिजन-गाइडेड हथियार बन जाएंगे, जो 100 किलोमीटर से भी ज्यादा दूर बैठे दुश्मन को 3 मीटर की सटीकता के साथ निशाना बना सकेंगे।

क्यों है यह अहम?

Apollo Micro Systems के लिए यह पैनलिंग डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में एक बड़ी उपलब्धि है। यह कंपनी को प्रिसिजन-गाइडेड म्यूनिशन (PGM) के क्षेत्र में एक अहम खिलाड़ी के तौर पर स्थापित करता है। भारतीय वायु सेना का यह कदम कंपनी की तकनीकी क्षमताओं पर भरोसे को दिखाता है। कंपनी का अनुमान है कि भारत में PGM इंपोर्ट सब्स्टीट्यूशन मार्केट अगले 10 सालों में ₹20,000 करोड़ से ज्यादा का हो सकता है, जबकि ग्लोबल ऑटोमेटेड/प्रिसिजन मार्केट 2032 तक $10 बिलियन तक पहुंच सकता है।

'मेक-II' का क्या मतलब है?

'मेक-II' कैटेगरी के तहत, प्राइवेट कंपनियां अपनी रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) में खुद पैसा लगाती हैं। सरकार सफल प्रोटोटाइप को बड़े पैमाने पर खरीदने का वादा करती है। यह सरकारी रणनीति देश में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने के 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के अनुरूप है। IPREK के गाइडेंस, नेविगेशन और कंट्रोल (GNC) सॉफ्टवेयर, फ्लाइट कंप्यूटर और इंटीग्रेशन आर्किटेक्चर पर Apollo Micro Systems का 100% स्वामित्व इसे एक मजबूत कॉम्पिटिटिव एज देता है।

आगे क्या होगा?

अब Apollo Micro Systems IPREK के R&D पर फोकस करेगी। कंपनी का रोल प्रिसिजन-गाइडेड म्यूनिशन सेगमेंट में एक प्रमुख ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर (OEM) के रूप में बदलेगा। डेवलपमेंट फेज में सफलता मिलने पर भारतीय वायु सेना और अन्य डिफेंस फोर्सेज से बड़े ऑर्डर्स मिल सकते हैं।

जोखिम पर रखें नजर

यह साफ कर दिया गया है कि यह पैनलिंग कोई पक्का कमर्शियल ऑर्डर नहीं है। रेवेन्यू तब ही जेनरेट होगा जब मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस (MoD) से फॉर्मल प्रोजेक्ट सैंक्शन ऑर्डर (PSO) जारी होगा और उसके बाद प्रोक्योरमेंट कॉन्ट्रैक्ट मिलेंगे। डेवलपमेंट प्रोग्राम की सफलता टेक्निकल माइलस्टोन्स को पूरा करने और सरकारी प्रोक्योरमेंट की टाइमलाइन पर भी निर्भर करेगी।

आगे क्या देखें

निवेशक मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस (MoD) से फॉर्मल प्रोजेक्ट सैंक्शन ऑर्डर (PSO) जारी होने का बेसब्री से इंतजार करेंगे। IPREK सिस्टम के लिए बाद में मिलने वाले प्रोक्योरमेंट कॉन्ट्रैक्ट्स इस हाई-वैल्यू डिफेंस सेगमेंट में Apollo Micro Systems के लिए कमर्शियल रियलाइजेशन और फ्यूचर रेवेन्यू स्ट्रीम के प्रमुख इंडिकेटर होंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.